
मुंबई। महाराष्ट्र मंत्रिमंडल ने आज मत्स्यव्यवसाय को कृषि का दर्जा देने का ऐतिहासिक और क्रांतिकारी निर्णय लिया है। इस निर्णय से राज्य के 4 लाख 83 हजार मछुआरों को सीधा लाभ मिलेगा। इस घोषणा के बाद मत्स्यव्यवसाय मंत्री नितेश राणे ने मंत्रालय के विधिमंडल वार्ताहर कक्ष में आयोजित पत्रकार परिषद में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उपमुख्यमंत्री अजित पवार समेत पूरे मंत्रिमंडल का आभार व्यक्त किया। इस मौके पर विधायक महेश बालदे और कई कोळी समाज के सदस्य उपस्थित थे। मंत्री राणे ने कहा कि, मत्स्य व्यवसाय का देश को प्रोटीन युक्त आहार और विदेशी मुद्रा उपलब्ध कराने में बड़ा योगदान है। अब तक इस क्षेत्र को कृषि का दर्जा न मिलने से मछुआरों और मत्स्य पालकों को सरकारी योजनाओं और सब्सिडी से वंचित रहना पड़ता था। लेकिन इस निर्णय के बाद उन्हें खेती की तरह सभी मूलभूत सुविधाएं और रियायतें मिलेंगी, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।”
अब मत्स्य व्यवसाय को मिलेंगी ये सुविधाएं:
मत्स्यबीज, खाद्य सामग्री, एयर पंप, एरेटर्स आदि खरीदने पर अनुदान मिलेगा।
शीतगृह (कोल्ड स्टोरेज) और बर्फ कारखानों को सरकारी सहायता मिलेगी।
फसल बीमा की तरह मछलीपालकों को भी बीमा योजना का लाभ मिलेगा।
प्राकृतिक आपदाओं (जैसे drought या अतिवृष्टि) की स्थिति में राहत पैकेज प्रदान किया जाएगा।
मत्स्यपालकों को कृषि दर पर बिजली, किसान क्रेडिट कार्ड, और कम ब्याज पर कृषि ऋण भी मिलेगा।
मत्स्यपालन इकाइयों, प्रोसेसिंग यूनिट्स को कृषि दर पर ऊर्जा और संसाधन मिलेंगे।
किनारपट्टी और आंतरिक क्षेत्र के विकास को मिलेगा बढ़ावा
मंत्री राणे ने कहा कि इस फैसले से सिर्फ मछुआरों को ही नहीं, बल्कि पूरे किनारी और आंतरिक भागों के आर्थिक विकास को नई दिशा मिलेगी। साथ ही रोजगार के नए अवसर भी उत्पन्न होंगे। इस कदम से मत्स्य व्यवसाय को नई गति और संरक्षित भविष्य मिलेगा।




