8 महीने से निलंबित एफडीए के 3 अधिकारी, संगठन ने दी 23 मार्च से राज्यव्यापी कामबंद आंदोलन की चेतावनी
न्यायालय के आदेशों की अनदेखी क्यों कर रही सरकार?

मुंबई। महाराष्ट्र खाद्य व औषध प्रशासन (एफडीए) के तीन अधिकारियों के निलंबन का मुद्दा अब गंभीर विवाद का रूप लेता जा रहा है। निलंबन आदेश अदालत द्वारा रद्द किए जाने के बावजूद पिछले आठ महीनों से अधिकारियों को सेवा में बहाल नहीं किया गया है। एफडीए मंत्री नरहरी झिरवाल की कार्यप्रणाली से अब अधिकारियों में निराशा व सरकार के विरुद्ध माहौल बनता दिख रहा है। इस मामले को लेकर महाराष्ट्र राज्य अन्न अधिकारी कल्याणकारी संघटना ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि 23 मार्च 2026 से पहले निलंबन आदेश वापस नहीं लिया गया, तो पूरे राज्य में कामबंद आंदोलन शुरू किया जाएगा। बताया गया है कि पावसाळी अधिवेशन के दौरान पूछे गए तारांकित प्रश्न क्रमांक 10257 (7 जुलाई 2025) के संदर्भ में राज्य सरकार ने 15 जुलाई 2025 को आदेश जारी कर सह आयुक्त महेश चौधरी, सहायक आयुक्त संदीप देवरे और खाद्य सुरक्षा अधिकारी आनंद पवार को पूर्व प्रभाव से निलंबित कर दिया था। निलंबन आदेश के खिलाफ संबंधित अधिकारियों ने महाराष्ट्र प्रशासनिक न्यायाधिकरण (MAT), मुंबई में अपील दायर की। सुनवाई के बाद न्यायाधिकरण ने 17 सितंबर 2025 को दिए अपने फैसले में सरकार के निलंबन आदेश को कानून के अनुरूप नहीं मानते हुए रद्द कर दिया और अधिकारियों को सेवा में पुनः बहाल करने के निर्देश दिए। इसके बाद राज्य सरकार ने इस फैसले को चुनौती देते हुए मुंबई उच्च न्यायालय में अपील दायर की। उच्च न्यायालय ने मामले का पुनर्विचार कर अंतिम निर्णय देने के निर्देश महाराष्ट्र प्रशासनिक न्यायाधिकरण को दिए। पुनर्विचार के बाद न्यायाधिकरण ने 17 फरवरी 2026 को अपने अंतिम आदेश में भी सरकार के निलंबन आदेश को अवैध बताते हुए दोबारा रद्द कर दिया। हालांकि अदालत की इस प्रक्रिया के बावजूद संबंधित अधिकारियों को अभी तक सेवा में पुनर्स्थापित नहीं किया गया है। इस मुद्दे को लेकर संगठन ने कई बार एफडीए मंत्री नरहरी झिरवाल को निवेदन दिया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। इससे विभाग के अधिकारियों में रोष बढ़ता जा रहा है। वहीं महाराष्ट्र राज्य राजपत्रित अधिकारी महासंघ ने भी मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और एफडीए मंत्री नरहरी झिरवाल को पत्र लिखकर संबंधित अधिकारियों का निलंबन तुरंत वापस लेने की मांग की है। संगठन ने स्पष्ट किया है कि यदि न्यायालय के आदेश का पालन नहीं किया गया तो 23 मार्च 2026 से राज्यभर में कामबंद आंदोलन शुरू किया जाएगा।
“माननीय न्यायालय ने 17 सितंबर 2025 और 17 फरवरी 2026 को दो बार निलंबन आदेश रद्द करने के बावजूद संबंधित अधिकारियों को अब तक सेवा में पुनः शामिल नहीं किया गया है, जो अत्यंत खेदजनक है। न्यायालय के आदेश का तुरंत पालन करते हुए महेश चौधरी, संदीप देवरे और आनंद पवार को उनके पदों पर पुनः बहाल किया जाना चाहिए। यह हमारी संगठन की स्पष्ट मांग है। यदि ऐसा नहीं किया गया तो 23 मार्च 2026 से राज्य के खाद्य अधिकारी अनिश्चितकालीन कामबंद आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे। हालांकि, हमारी अपेक्षा है कि प्रशासन सकारात्मक निर्णय लेते हुए इस मुद्दे का जल्द समाधान करेगा। – गोपाल माहोरे सचिव- महाराष्ट्र राज्य अन्न अधिकारी कल्याणकारी संघटना




