
मुंबई। महाराष्ट्र सरकार की महिला व बाल विकास मंत्री अदिती तटकरे ने विधवा प्रथाओं के खिलाफ जनजागरूकता अभियान को और अधिक प्रभावी बनाने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा है कि मिशन वात्सल्य योजना के माध्यम से समाज में व्याप्त इस अमानवीय सोच को समाप्त किया जाना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि कुछ क्षेत्रों में आज भी कुंकू पोंछने, मंगलसूत्र तोड़ने, चूड़ियां फोड़ने जैसी विधवा प्रथाएं प्रचलित हैं, जो सीधे-सीधे मानवाधिकारों का उल्लंघन हैं। मंत्रालय में हाल ही में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में अदिती तटकरे ने राज्यव्यापी प्रस्ताव के कार्यान्वयन की समीक्षा की। बैठक में प्रमुख सचिव डॉ. अनुपकुमार यादव, महिला व बाल विकास आयुक्त नैना गुंडे, सह सचिव वी. आर. ठाकूर, और सह आयुक्त राहुल मोरे उपस्थित थे।
हर स्तर पर जनजागृति आवश्यक
मंत्री तटकरे ने कहा कि विधवा महिलाओं को भी समाज में अन्य महिलाओं की तरह सम्मान से जीने का पूरा हक है। उन्हें समाज से अलग-थलग कर देना, धार्मिक या सामाजिक आयोजनों से वंचित रखना, या प्रतीकात्मक तौर पर उन्हें “अशुभ” मानना, कठोर सामाजिक अन्याय है। मिशन वात्सल्य योजना के अंतर्गत गांव-गांव और वार्ड-वार्ड में जागरूकता फैलाने के लिए विशेष कार्यक्रम शुरू किए गए हैं।
समितियों का गठन व सक्रियता
राज्य सरकार ने 36,205 ग्रामस्तरीय समितियां और 4,909 वॉर्डस्तरीय समितियां गठित की हैं, जो विधवा प्रथाओं पर रोक लगाने और जनजागृति फैलाने का काम कर रही हैं। इन समितियों में ग्रामसेवक, तलाठी, प्राथमिक शिक्षक, आंगनवाड़ी सेविकाएं, और स्थानीय वार्ड अधिकारी शामिल हैं। इनके माध्यम से स्थानीय स्तर पर नागरिकों को जागरूक किया जा रहा है, और किसी भी प्रकार की कुप्रथा की जानकारी तत्काल संबंधित प्राधिकरण को दी जा सकती है।
तकनीक व आधुनिक दृष्टिकोण का होगा उपयोग
तटकरे ने सुझाव दिया कि आधुनिक तकनीकों जैसे डिजिटल जागरूकता वीडियो, सोशल मीडिया प्रचार और सामूहिक संवाद मंचों का उपयोग करते हुए तालुका स्तर तक जनजागृति अभियान चलाया जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने नागरिकों से भी इस मुहिम में सहभागी बनने की अपील की ताकि विधवा प्रथाओं को समाज से पूरी तरह समाप्त किया जा सके।
मिशन वात्सल्य: उद्देश्य और कार्य
मिशन वात्सल्य योजना का उद्देश्य विधवा महिलाओं के जीवन में सम्मान, आत्मनिर्भरता और सामाजिक न्याय सुनिश्चित करना है। इस योजना के माध्यम से उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाना, सामाजिक समावेशिता को बढ़ावा देना और उनकी मानसिक, भावनात्मक तथा सामाजिक स्थिति को सशक्त करना प्राथमिकता है। अंततः मंत्री अदिती तटकरे ने स्पष्ट संदेश दिया– अब समय आ गया है कि समाज इन पुरानी और अपमानजनक प्रथाओं से बाहर निकले और हर महिला को गरिमा से जीने का अवसर दे।




