Monday, March 23, 2026
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दृष्टिकोण: दंडनीय अपराध घोषित हो सार्वजनिक मार्गों पर अतिक्रमण

डॉ.सुधाकर आशावादी
स्वस्थ लोकतंत्र में जहाँ जियो और जीने दो की भावना सर्वोपरि होनी अपेक्षित हैं, वही आम नागरिक अपने नागरिक दायित्वों की अवहेलना करने में पीछे नहीं है, जिसके चलते सार्वजनिक मार्गों तथा स्थलों पर अतिक्रमण बढ़ता जा रहा है। कहना गलत न होगा, कि छोटी छोटी गलियों से लेकर बड़े सार्वजानिक मार्गों पर भवन निर्माण करते हुए अतिक्रमण किए जाने के अनेक किस्से प्रकाश में आते हैं। गली मुहल्लों में संबंधित नगर निकायों, विकास प्राधिकरणों की लापरवाही के चलते लोगों ने अपने मुख्य द्वार के सम्मुख डेढ़ से तीन फिट तक सड़क पर अतिक्रमण करने को अपना मौलिक अधिकार मान लिया है। सड़क के किनारे नालियों पर अतिक्रमण करना तो जैसे उनके लिए कोई मायने नहीं रखता। जिस कारण मुहल्लों से लेकर मुख्य मार्गों तक अतिक्रमण के कारण मार्ग संकरे होते जा रहे हैं। यदा कदा अतिक्रमण हटाने के अभियान चलाए भी जाते हैं, लेकिन वे ऊँट के मुंह में जीरे के समान ही सिद्ध होते हैं। कारण स्पष्ट है, कि कहीं अतिक्रमण के समर्थन में क्षेत्र के जनप्रतिनिधि खड़े हो जाते हैं, कहीं अतिक्रमणकारियों की दबंगई। एक बात और चिंतनीय है, कि प्रशासनिक तथा पुलिस अधिकारियों की लापरवाही से भी यह समस्या विकराल रूप लेती जा रही है। वस्तुस्थिति यह है कि कहीं कहीं पारिवारिक उत्सवों के लिए मुख्य मार्गों पर तम्बू लगाकर अस्थाई अतिक्रमण करने में कुछ लोग सक्रिय रहते हैं, कहीं बारह फिट की गलियों में दोनों ओर ढाई या तीन फिट का सड़क पर अतिक्रमण करके सड़कों को संकरा कर दिया जाता है। बहुधा धार्मिक स्थलों के नाम पर अतिक्रमण किया जाना आम बात हो गई है।
आवास विकास एवं विकास प्राधिकरणों द्वारा बनाई गई कॉलोनियों में भी लोग धार्मिक आधार पर अतिक्रमण करने में पीछे नहीं रहते। ऐसे में आम आदमी की क्या बिसात कि वह अवैध अतिक्रमण के विरुद्ध कोई कार्यवाही कर सके। कहने के कुछ प्रदेशों में कानून व्यवस्था को सुदृढ़ घोषित किया जाता है, किन्तु वास्तविक धरातल पर स्थिति सर्वथा प्रतिकूल ही प्रतीत होती है। ऐसे में आवश्यक है, कि किसी भी नगर या महानगर में प्राथमिक आधार पर सड़क घेर कर किये जाने वाले आयोजन प्रतिबंधित हों तथा किसी संपर्क मार्ग पर सड़क पर किये जाने वाले किसी भी अतिक्रमण को तुरंत हटाने की कार्यवाही की जाए। यही नहीं सार्वजानिक मार्गों व सार्वजनिक स्थलों पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण दंडनीय अपराध घोषित हो, ताकि कोई भी नागरिक किसी भी सार्वजनिक स्थल पर अतिक्रमण करने का दुस्साहस सके।

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