
आधी रात में पाकिस्तानी आतंकियों की कमर तोड़ने के लिए भारतीय सेना ने पहलगाम आतंकी हमले के 15 दिनों बाद, भारतीय फौज ने 24 मिसाइलें रात बारह बजे के आसपास “ऑपरेशन सिंदूर” नाम से एयर स्ट्राइक किया। भारतीय सेना ने नौ आतंकी ठिकानों पर हमला किया, जिसमें एएनआई के अनुसार जैश-ए-मुहम्मद के 4, लश्कर-ए-तैयबा के 3 और हिजबुल मुजाहिदीन के 2 ठिकानों पर हमला हुआ है, जिनमें सौ से ज्यादा आतंकी मारे गए। मारे तो और जाते, लेकिन आतंकी सरगनाओं ने भारत द्वारा बदला लिए जाने के भय से अपने कई आतंकी पहले ही वहां से हटा दिए थे। आम जनता और पाकिस्तानी फौज पर कोई भी हमला नहीं किया गया। भारतीय सेना ने बहावलपुर में स्थित जैश के हेडक्वार्टर “मरकज सुबहान”, मुरीद नगर की “उमालकुरा मस्जिद” को भी निशाना बनाया, जो लश्कर का बड़ा केंद्र था, जहां आतंकियों को ट्रेनिंग दी जाती है। “मरकज तैयबा मुरीदके” पंजाब को ओसामा बिन लादेन ने फंडिंग की थी। “सरजाल तह रा” जैश की अहम लांचिंग पैड है। यहीं से भारत-पाक बॉर्डर पर सुरंग खोदी जाती हैं, जिनसे होकर आतंकी भारत में घुसते हैं। “महामुना जोया”, सियालकोट हिजबुल मुजाहिदीन का ट्रेनिंग कैंप है, जिसकी स्थापना पाकिस्तानी आईएसआई की मदद से हुई थी। मोहम्मद इरफान खान अबू लला माज भाई और इरफान घुम्मन यहीं से हिजबुल को ऑपरेट करते थे। “मरकज ए अहले हदीस बरनाला”, लश्कर का बड़ा अड्डा है, जहां से पूंछ, राजौरी, रियासी सेक्टर में आतंकी घुसते हैं। “मरकज अब्बास कोटली”, जैश के प्रमुख सेंटर है, जो पाकिस्तानी मिलिट्री कैंप से दो किलोमीटर दूर है। “मस्कर राहिल शाहिद कोटली”, हिजबुल का सेंटर है, जहां ट्रेनिंग दी जाती है। “शाबाई नाला कैंप”, मुजफ्फराबाद लश्कर का है। “सैयदना बिलाल कैंप”, मुजफ्फराबाद जैश का ठिकाना है। इन पर एयरस्ट्राइक करने पर भारतीय सेना के शौर्य को पुनः सलाम। पाकिस्तान का दावा है कि उसने भारत के तीन राफेल, दो मिग विमान मार गिराए हैं। यह दावा झूठा साबित होता है। सच तो यह है कि भटिंडा और अखनूर में जो दो मिग विमान 21/5/2021 में क्रैश हुए थे। तीसरा दावा कि इंडियन ब्रिगेड हेडक्वार्टर को ध्वस्त करने का मामला पीआईबी के फैक्ट चेक में झूठा निकला। भारत की एयर स्ट्राइक मुजफ्फराबाद, गुलपुर, सियालकोट, मुरीदके, बहावलपुर, बाघ, कोटली, भीमबेर और चक अमरु पर सफलता पूर्वक किया गया। कश्मीर के जम्मू में तीन और पंजाब में एक फाइटर जेट गिराए गए, जिनमें गोला-बारूद और बम थे। इंडियन एयरफोर्स के रिटायर्ड अफसर उन विमानों को फाइटर जेट JF-17 बताते हैं। आम पाकिस्तानी मुसलमान, पाकिस्तानी सेना द्वारा अपने हथियारों का परीक्षण कर रही थी, तब पाकिस्तान के इस्लामाबाद की लाल मस्जिद के मौलाना अब्दुल अजीज गाजी का पाकिस्तान विरोधी वीडियो वायरल हुआ, जिसमें कहते हैं कि भारत-पाक युद्ध में पाकिस्तानी अवाम सेना और सरकार के साथ नहीं है। चीनी प्रवक्ता एयर स्ट्राइक को दुर्भाग्यपूर्ण कह रहा है। तुर्की इस्लामिक देशों का मुखिया बनने के लिए पाकिस्तान को ड्रोन और अन्य हथियार देकर युद्ध कराना चाहता था, लेकिन उसे मायूसी ही हाथ लगी है। एक तरफ पाकिस्तानी मुसलमान भारत के साथ युद्ध होने की स्थिति में पाक सेना का साथ देने से मना कर रहे हैं, वहीं भारत के सभी विपक्षी दल, हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौद्ध और जैन आतंकवाद के खात्मे के लिए देशभर में रैलियां निकालकर सरकार के साथ खड़े हैं। जिन कश्मीरियों को देशद्रोही बताया जा रहा था, वे भी तो पाकिस्तानी आतंकवाद से पीड़ित हैं। वे उन हिंदुओं को बचाने के लिए अपनी जान पर खेल गए। लोगों ने यहां तक कि बीजेपी के नेता के 11 परिजनों को सुरक्षित रखा। उस शहीद की विधवा बार-बार कह रही है- कश्मीरी मुसलमान आतंकी नहीं हैं। जितने भी पर्यटक कश्मीर घूमने गए थे, सबने एक ही बात कही- कश्मीरी मुसलमानों ने हमें अपने घर में सुरक्षित रखा। टैक्सी और होटल वालों ने भाड़ा तक नहीं लिया। श्रीनगर हवाईअड्डे तक छोड़ने आए, बहुत ही अच्छे हैं। संभव है, उनमें से एक प्रतिशत आतंकियों के ग्राउंड वर्कर हो सकते हैं। उन्हें पहचान कर दंड दिया जाए। उनके लिए समूचे कश्मीरी मुसलमानों को आतंकी कहना उचित नहीं। कश्मीरी छात्रों को भारत में धमकियां दी गईं। उन्हें कश्मीर भगाने को कहा गया। उत्तराखंड में मुसलमानों की दुकानें लूटी गईं। उन्हें बाहर निकालकर मारा-पीटा गया।यह कत्तई उचित नहीं। भारतीय मुसलमान गद्दार नहीं हैं। सभी बॉर्डर पर जाकर पाकिस्तानी सेना से लड़कर शहादत देने का ऐलान कर रहे हैं। सरकार के साथ हैं। यदि वोट बैंक के लिए राजनीतिक ज़हर बोया जाता रहेगा, तो अर्थ होगा। ऐसा करने वाले आतंकियों के समर्थक हैं।




