
मुंबई। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 5,600 करोड़ रुपये के नेशनल स्पॉट एक्सचेंज लिमिटेड (एनएसईएल) निवेश घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सोमवार को 115.86 करोड़ रुपये की अचल संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क कीं। इस ताजा कार्रवाई के बाद, अब तक इस मामले में कुल 3,433.06 करोड़ रुपये की संपत्तियां कुर्क की जा चुकी हैं।
किन संपत्तियों को कुर्क किया गया?
ईडी के अनुसार, कुर्क की गई संपत्तियों में एनएसईएल के विभिन्न डिफॉल्टरों—मोहन इंडिया ग्रुप, विमलादेवी एग्रोटेक लिमिटेड, यथुरी एसोसिएट्स और लोटस रिफाइनरीज की मुंबई, दिल्ली और राजस्थान में स्थित 15 अचल संपत्तियां शामिल हैं।
कैसे हुआ 5,600 करोड़ का घोटाला?
ईडी के मुताबिक, इस मामले में आरोपी व्यक्तियों ने निवेशकों को धोखा देने के लिए आपराधिक साजिश रची और उन्हें एनएसईएल के प्लेटफॉर्म पर व्यापार करने के लिए प्रेरित किया। इसके लिए कथित तौर पर फर्जी गोदाम रसीदें और अन्य जाली दस्तावेज बनाए गए। आरोपियों ने खातों में हेराफेरी कर निवेशकों के साथ आपराधिक विश्वासघात किया, जिससे उन्हें 5,600 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
निवेशकों के पैसे का किया गबन
ईडी ने बयान में कहा कि एनएसईएल ने विक्रेताओं को बिना यह सुनिश्चित किए कि उनके गोदामों में उचित मात्रा और गुणवत्ता की वस्तुएं उपलब्ध हैं, व्यापार करने की अनुमति दी। इससे हजारों निवेशकों ने गैर-मौजूद वस्तुओं में निवेश कर दिया। साथ ही, निवेशकों से एकत्र की गई राशि को एनएसईएल के व्यापारिक सदस्यों (डिफॉल्टरों) द्वारा रियल एस्टेट में निवेश करने, बकाया ऋण चुकाने और अन्य गैर-कानूनी गतिविधियों में इस्तेमाल किया गया। ईडी इस मामले में पहले ही एनएसईएल, विभिन्न डिफॉल्टरों और ब्रोकिंग कंपनियों के खिलाफ सात अभियोजन शिकायतें (चार्जशीट) दाखिल कर चुका है।




