Wednesday, March 4, 2026
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गोवा में सीएमओ के सार्वजनिक निलंबन पर डॉक्टरों का विरोध, पीएम मोदी को पत्र लिख कर MSRDA ने की सार्वजनिक माफी की मांग

मुंबई/पणजी। गोवा मेडिकल कॉलेज और अस्पताल (GMCH) में एक मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) को राज्य के स्वास्थ्य मंत्री विश्वजीत राणे द्वारा सार्वजनिक रूप से निलंबित किए जाने के मामले में महाराष्ट्र सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (MSRDA) ने कड़ा विरोध दर्ज किया है। एसोसिएशन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर इस घटना को “चिकित्सा पेशे की गरिमा और मनोबल पर गहरी चोट” बताया है और स्वास्थ्य मंत्री से सार्वजनिक माफ़ी की माँग की है। यह घटना 7 जून को हुई जब मंत्री राणे ने कथित रूप से बिना किसी पूर्व जांच या स्पष्टीकरण के, GMCH के CMO को अस्पताल के अंदर जनता के सामने निलंबित कर दिया। हालांकि गोवा के मुख्यमंत्री ने बाद में निलंबन को रद्द कर दिया, लेकिन डॉक्टरों के संगठनों और चिकित्सा समुदाय में इस कदम को लेकर तीव्र असंतोष देखने को मिला है। प्रधानमंत्री को भेजे गए पत्र में MSRDA ने लिखा- यह प्रकरण केवल नौकरशाही की चूक नहीं है। यह एक चिंताजनक प्रवृत्ति का प्रतीक है, जहाँ डॉक्टरों को राजनीतिक या प्रशासनिक असफलताओं के लिए बलि का बकरा बनाया जाता है।
एसोसिएशन ने 2019 के कोलकाता घटना की भी याद दिलाई, जहाँ जूनियर डॉक्टरों पर हमला हुआ था, और अन्य घटनाओं को भी जोड़ा, जहाँ चिकित्सकों को मौखिक और शारीरिक हमलों का सामना करना पड़ा है। MSRDA ने पत्र में जोर दिया कि भारत में सरकारी डॉक्टर अत्यधिक काम के दबाव में, सीमित संसाधनों के बावजूद, ग्रामीण और शहरी स्वास्थ्य सेवाओं में लगातार सेवा दे रहे हैं। कभी-कभी 48 घंटे की नॉनस्टॉप शिफ्ट में। इसके बावजूद, उन्हें अक्सर दोषारोपण, सार्वजनिक अपमान और राजनीतिक हस्तक्षेप का सामना करना पड़ता है।
गोवा के स्वास्थ्य मंत्री से सार्वजनिक माफ़ी की माँग
डॉक्टरों के निकाय ने स्पष्ट रूप से कहा है कि वे गोवा के स्वास्थ्य मंत्री से GMCH के कैजुअल्टी विभाग में औपचारिक सार्वजनिक माफ़ी की माँग करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यह माफ़ी आत्मसमर्पण का संकेत नहीं, बल्कि राज्य के चिकित्सा पेशेवरों के प्रति सम्मान का प्रतीकात्मक और नैतिक क़दम होगी। पत्र में यह भी टिप्पणी की गई कि, “फिल्मों में जो दिखता है वह काल्पनिक नहीं होता। डॉक्टरों का अपमान, ज़्यादा काम और कम वेतन जैसी स्थितियाँ उनकी असली ज़िंदगी का हिस्सा हैं।” डॉक्टरों का राजनीतिक वर्ग के साथ सबसे अधिक संपर्क होता है और ऐसे में सुरक्षा, सम्मान और संस्थागत समर्थन अनिवार्य हो जाता है।

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