
देवेश प्रताप सिंह राठौर
झांसी, उत्तर प्रदेश। कलेक्ट्रेट के नवीन सभागार में जिला स्तरीय समीक्षा समिति और जिला सलाहकार समिति की बैठक की अध्यक्षता करते हुए मृदुल चौधरी ने बैंक अधिकारियों को शासन की योजनाओं के क्रियान्वयन में सक्रिय सहयोग देने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने कहा कि बैंकर्स प्रदेश और जनपद के विकास में सरकार की मंशा के अनुरूप कार्य करें तथा केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करें। बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने योजनाओं के आवेदनों को अनावश्यक रूप से निरस्त किए जाने और लंबित रखने पर नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि बैंक अधिकारी किसानों, आमजन और लाभार्थियों के प्रति संवेदनशील होकर कार्य करें। साथ ही अनावश्यक रूप से निरस्त किए गए आवेदनों की जांच के लिए समिति गठित करने के निर्देश दिए। यह समिति विभिन्न बैंकों में निरस्त किए गए आवेदनों की जांच कर अपनी रिपोर्ट शासन को भेजेगी और यदि किसी आवेदन को बिना कारण निरस्त किया गया पाया गया तो संबंधित के विरुद्ध कार्रवाई की संस्तुति की जाएगी। समीक्षा के दौरान 50 प्रतिशत से कम सीडी रेशियो वाले बैंकों, जिनमें पंजाब नेशनल बैंक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन ओवरसीज बैंक और पंजाब एंड सिंध बैंक सहित 10 बैंक शामिल हैं, को कड़ी फटकार लगाते हुए सीडी रेशियो में सुधार लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इसके लिए एक्शन प्लान तैयार कर उसे प्रभावी ढंग से लागू किया जाए, अन्यथा कार्रवाई की जाएगी। जिलाधिकारी ने बैंकों को प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में ऋण वितरण बढ़ाने के लिए विशेष कैंप आयोजित करने के निर्देश दिए। उन्होंने इंडियन बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन ओवरसीज बैंक, पंजाब एंड सिंध बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया तथा लीड बैंक पंजाब नेशनल बैंक सहित अन्य बैंकों द्वारा सरकारी योजनाओं के अंतर्गत ऋण वितरण में उदासीनता पर नाराजगी जताई। उन्होंने मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान में खराब प्रदर्शन पर भी नाराजगी व्यक्त की। समीक्षा के दौरान बताया गया कि पंजाब नेशनल बैंक ने 894, बैंक ऑफ इंडिया ने 214, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया ने 199, एचडीएफसी बैंक ने 124, यूपी ग्रामीण बैंक ने 412 तथा इंडियन बैंक सहित कुल 19 बैंकों ने 3794 आवेदन निरस्त किए हैं। जिलाधिकारी ने इन मामलों की जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए और कहा कि आवेदनों पर पुनर्विचार कर योग्य लाभार्थियों को ऋण उपलब्ध कराया जाए। बैठक में स्वयं सहायता समूहों के सीसीएल मामलों की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने 1051 सीसीएल फाइलें लंबित रहने पर नाराजगी जताई। इनमें सबसे अधिक 404 फाइलें लीड बैंक पंजाब नेशनल बैंक, 251 प्रथमा यूपी ग्रामीण बैंक, 216 स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और 141 बैंक ऑफ इंडिया में लंबित पाई गईं। उन्होंने ब्लॉक स्तर पर कैंप आयोजित कर सभी आवेदनों का शीघ्र निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना, एक जनपद एक उत्पाद योजना और मुख्यमंत्री माटीकला रोजगार योजना के अंतर्गत भेजे गए आवेदनों की भी समीक्षा करते हुए लंबित मामलों को तत्काल निस्तारित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि युवाओं को स्वावलंबी बनाने के लिए बैंकों को योजनाओं के तहत ऋण स्वीकृति और वितरण में सक्रिय भूमिका निभानी होगी। बैठक में मुख्य विकास अधिकारी जुनैद अहमद, आरबीआई के एलडीओ विशाल यादव, डीसी एनआरएलएम सुनील कुमार सिंह, सहायक आयुक्त उद्योग प्रज्ञा वर्मा, अग्रणी बैंक प्रबंधक अजय कुमार शर्मा, डीडीएम नाबार्ड भूपेश पाल सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी और बैंक प्रतिनिधि उपस्थित रहे।




