
झांसी, उत्तर प्रदेश। झाँसी जिले के जिलाधिकारी मृदुल चौधरी ने आज झांसी नगर स्थित बिपिन बिहारी इंटर कॉलेज का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने बच्चों की उपस्थिति के संबंध में जानकारी ली और उपस्थिति पंजिका का निरीक्षण करते हुए शत-प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने ‘निपुण भारत’ योजना के अंतर्गत बनाए गए रजिस्टरों की जांच की और रजिस्टर के अनुसार बच्चों की पढ़ाई की गुणवत्ता का आकलन किया। उन्होंने शिक्षकों को निर्देशित किया कि वे अपनी-अपनी कक्षाओं पर विशेष ध्यान दें तथा आवंटित विषयों का ही अध्यापन करें, जिससे बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके। उन्होंने कहा कि हर स्थिति में बच्चों की शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार किया जाना चाहिए। साथ ही विद्यालय परिसर में साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देने के निर्देश भी दिए गए। जिलाधिकारी ने कक्षाओं में जाकर बच्चों से अंग्रेजी एवं गणित के सामान्य प्रश्न पूछे और उनके बौद्धिक स्तर की जानकारी ली। बच्चों द्वारा सही उत्तर दिए जाने पर उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने बच्चों से संवाद करते हुए उनके भविष्य की योजनाओं के बारे में भी पूछा और उन्हें शुभकामनाएं दीं।
मिड-डे-मील (एमडीएम) की गुणवत्ता का भी लिया जायजा
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने मिड-डे-मील में बनाए गए भोजन (तहरी) को स्वयं चखकर उसकी गुणवत्ता और स्वाद पर संतोष व्यक्त किया। हालांकि, उन्होंने पाया कि मिड-डे-मील का वितरण निर्धारित समय से विलंब से किया गया था, जिस पर उन्होंने नाराजगी जताते हुए समय से भोजन उपलब्ध कराने तथा मेनू के अनुसार भोजन दिए जाने के निर्देश दिए।
भोजनशाला निरीक्षण में मिली खामियां
जिलाधिकारी ने भोजनशाला का भी निरीक्षण किया। इस दौरान भोजनशाला के पीछे स्थित खिड़कियों की जालियां टूटी पाई गईं, जिससे चूहों के आने की संभावना जताई गई। उन्होंने भोजन की शुचिता बनाए रखने के दृष्टिगत जालियों को तत्काल ठीक कराने के निर्देश दिए। इसके अलावा, भोजनशाला के बाहर तथा कक्षाओं में गंदगी पाए जाने पर उन्होंने प्रधानाचार्य को नियमित साफ-सफाई सुनिश्चित करने और स्वच्छता पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए, ताकि बच्चों को शिक्षा के लिए स्वस्थ वातावरण मिल सके। इस अवसर पर तहसीलदार सदर श्री विवेक कुमार, प्रधानाचार्य श्री दीनकर सक्सेना, श्री यशवंत सिंह सहित अन्य शिक्षक एवं छात्र उपस्थित रहे।
मिड-डे-मील की सामग्री की गुणवत्ता पर भी उठे सवाल
निरीक्षण के बाद शिक्षा से जुड़े कुछ जानकारों और स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा सामने आई है कि विद्यालयों में मिड-डे-मील के लिए जो राशन और सामग्री कंट्रोल/आपूर्ति केंद्रों से प्राप्त होती है, उसकी गुणवत्ता कई बार बेहद खराब होती है। बताया जा रहा है कि कई स्कूलों में शिक्षक बच्चों को अच्छा और स्वच्छ भोजन देने का प्रयास करते हैं, लेकिन कंट्रोल से आने वाला गेहूं और अन्य सामग्री अक्सर घटिया गुणवत्ता की होती है, जिससे भोजन की शुद्धता और स्तर प्रभावित होता है। सूत्रों के अनुसार, शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार और आपूर्ति प्रणाली में खामियों के कारण भी शुद्ध और उच्च गुणवत्ता की सामग्री समय पर नहीं मिल पाती। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि केवल स्कूल स्तर पर ही नहीं, बल्कि पूरी आपूर्ति श्रृंखला में पारदर्शिता, ईमानदारी और सख्त निगरानी की आवश्यकता है, ताकि बच्चों को वास्तव में स्वच्छ, पौष्टिक और गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराया जा सके।




