
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को दिल्ली हाईकोर्ट को निर्देश दिया कि वह दीवान हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड (डीएचएफएल) के पूर्व प्रमोटर कपिल वधावन की जमानत याचिका पर दो सप्ताह के भीतर फैसला करे। कपिल वधावन करोड़ों रुपये के बैंक धोखाधड़ी मामले में सीबीआई की जांच के तहत हिरासत में हैं और जुलाई 2022 से जेल में बंद हैं। जस्टिस उज्ज्वल भुइयां और जस्टिस मनमोहन की अवकाश पीठ ने यह निर्देश देते हुए कहा कि वधावन की जमानत याचिका 18 जुलाई को सूचीबद्ध है, लेकिन इसे कई बार स्थगित किया जा चुका है, जिससे उनका मामला अनावश्यक रूप से लंबित है। शीर्ष अदालत के समक्ष कपिल वधावन ने लंबे समय से हिरासत में रहने और सुनवाई में हो रही देरी के आधार पर शीघ्र निपटारे की मांग की थी। कोर्ट को यह भी सूचित किया गया कि कपिल और उनके भाई धीरज वधावन को 19 जुलाई 2022 को गिरफ्तार किया गया था, जबकि धीरज वधावन को 9 सितंबर 2024 को मेडिकल आधार पर अंतरिम जमानत दे दी गई थी। मामले में एफआईआर यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की शिकायत के आधार पर दर्ज की गई थी। सीबीआई द्वारा 15 अक्टूबर 2022 को चार्जशीट दाखिल की गई और ट्रायल कोर्ट ने इस पर संज्ञान भी लिया था। सीबीआई के अनुसार, डीएचएफएल, इसके तत्कालीन चेयरमैन और प्रबंध निदेशक कपिल वधावन, तत्कालीन निदेशक धीरज वधावन तथा अन्य आरोपियों ने यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के नेतृत्व वाले 17 बैंकों के कंसोर्टियम के साथ 42,871.42 करोड़ रुपये के ऋण धोखाधड़ी की साजिश रची। एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि आरोपियों ने जालसाजी और झूठे दस्तावेजों के जरिए कर्ज मंजूर करवाया, जिससे 31 जुलाई 2020 तक की बकाया राशि के आधार पर कंसोर्टियम को 34,615 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। इस घोटाले को भारत के सबसे बड़े बैंकिंग घोटालों में से एक माना जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश से अब उम्मीद जताई जा रही है कि कपिल वधावन की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट जल्द ही कोई ठोस निर्णय लेगा, जिससे उनके हिरासत की अवधि और लंबी न खिंचे। यदि आप चाहें, तो इसका एक संक्षिप्त संस्करण, टीवी बुलेटिन स्क्रिप्ट, या सोशल मीडिया पोस्ट भी तैयार किया जा सकता है।




