Wednesday, February 4, 2026
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धर्मेंद्र तोमर का आतंक: दलित युवक के साथ अश्लील हरकत और सरेआम पिटाई, खौफ के साये में पलायन करने को मजबूर हुआ पीड़ित परिवार!”

इंद्र यादव
मध्य प्रदेश।
मुरैना जिले में मानवता को शर्मसार करने वाला एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहाँ एक दलित युवक को न केवल बंधक बनाकर पीटा गया, बल्कि उसके साथ अश्लील हरकतें कर उसे मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया। पुलिस ने मुख्य आरोपी आभाष उर्फ धर्मेंद्र तोमर को गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन इलाके में व्याप्त डर के कारण पीड़ित परिवार अपना घर छोड़ने को मजबूर हो गया है।
घटना का विवरण: क्रूरता की सारी हदें पार!
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पीड़ित युवक आरोपी की ही गली में किराए के मकान में रहता था। आरोपी धर्मेंद्र तोमर ने दबंगई दिखाते हुए युवक को पकड़ा और उसे ‘मुर्गा’ बनाकर सरेआम बेइज्जत किया। प्रत्यक्षदर्शियों और सूत्रों के मुताबिक, आरोपी ने न केवल युवक को थप्पड़ मारे, बल्कि उससे अश्लील हरकतें भी करवाईं। इस पूरी घटना का उद्देश्य पीड़ित को नीचा दिखाना और इलाके में अपनी दहशत फैलाना था।
भय के साये में पलायन!
इस घटना का सबसे दुखद पहलू यह है कि न्याय की उम्मीद के बीच पीड़ित परिवार गहरे सदमे और डर में है। आरोपी के रसूख और भविष्य में होने वाले संभावित हमलों के डर से युवक का परिवार रातों-रात अपना किराए का घर छोड़कर किसी अज्ञात स्थान पर चला गया है। यह समाज और प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है।
पुलिस कार्रवाई और वर्तमान स्थिति!
घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने और मामले के तूल पकड़ने के बाद पुलिस हरकत में आई। मुख्य आरोपी आभाष उर्फ धर्मेंद्र तोमर को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। आरोपी के खिलाफ SC/ST एक्ट और भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि क्या इस घटना में अन्य लोग भी शामिल थे और क्या परिवार को डरा-धमका कर भगाया गया है।
सामाजिक दृष्टिकोण: एक गंभीर चिंता!
यह घटना केवल एक आपराधिक कृत्य नहीं है, बल्कि यह दर्शाती है कि समाज के कुछ हिस्सों में आज भी जातिगत श्रेष्ठता का अहंकार किस कदर हावी है। एक दलित युवक को उसकी गरिमा से वंचित करना और उसे पलायन के लिए मजबूर कर देना, सभ्य समाज के माथे पर कलंक है।
मानवता: प्रशासन को न केवल आरोपी को कड़ी सजा दिलानी चाहिए, बल्कि पीड़ित परिवार को सुरक्षा का भरोसा दिलाकर उन्हें वापस उनके घर लाने की व्यवस्था भी करनी चाहिए।

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