
खंडवा, मध्य प्रदेश। प्रकृति से प्रेम जब समर्पण में बदलता है, तो उसका प्रभाव सीमाओं से परे जाकर पूरे समाज को प्रेरित करता है। खंडवा के दादाजी वार्ड निवासी मुकेश काले और उनके परिवार ने अपने घर की छत को ‘मन गार्डन’ में बदलकर यह साबित कर दिया है कि अगर नीयत नेक हो और प्रयास सच्चे हों, तो प्रकृति की सेवा भी घर से शुरू की जा सकती है। यह बगिया गौरैयाओं और अन्य पक्षियों का आत्मीय आश्रय बन चुकी है। दस वर्षों की मेहनत से उन्होंने इस स्थान को हरियाली, लकड़ी के सुंदर घरों, दाना-पानी और छांव से सजाया, जिससे यह एक स्वर्ग जैसा वातावरण बन गया है। उनकी पत्नी पूर्णिमा काले, बहू विनीता काले, और बेटे आदित्य व अर्थव भी इस सेवा में समर्पित हैं। प्राकृतिक संवर्धन के इस कार्य की सराहना करते हुए कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने 8 अप्रैल को काले परिवार को प्रशस्ति पत्र भेंट किया, जिसे पटवारी अशोक सिंह तंवर द्वारा उनके निवास पर सौंपा गया। कलेक्टर ने अपने संदेश में लिखा, “प्रकृति संरक्षण एवं संवर्धन के क्षेत्र में आपके परिवार द्वारा किया गया यह कार्य अत्यंत प्रशंसनीय है। यह समाज को नई दिशा देने वाला प्रेरणादायक प्रयास है। जिला प्रशासन सदैव इस प्रकार के प्रयासों के साथ खड़ा रहेगा। पूर्णिमा काले कहती हैं, “अब गौरैया हमारे परिवार का हिस्सा बन गई हैं। सुबह उनकी चहचहाहट से दिन शुरू होता है और शाम को लौटती हैं, जैसे घर की सदस्य हों। उनका यह लगाव केवल घर तक सीमित नहीं है। जब वह इंदौर अपने मायके जाती हैं, तो साथ पौधे, कलमें और हरियाली की सौगात लेकर जाती हैं। यह प्रकृति से उनका गहरा जुड़ाव दर्शाता है। मुकेश काले के मित्र हेमंत मोराने बताते हैं, मुकेश भाई ने साबित किया है कि छोटे-छोटे प्रयास भी बड़े बदलाव ला सकते हैं। यह कार्य केवल पर्यावरण प्रेम ही नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता का भी प्रतीक बन गया है। काले परिवार की पहल आज पूरे खंडवा में चर्चा का विषय है। यह संदेश देती है कि यदि इच्छाशक्ति हो, तो प्रकृति से जुड़ाव न केवल संभव है, बल्कि जीवन को समृद्ध और आनंदमय बनाने की दिशा में एक ठोस कदम भी है।




