
नागपुर। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि वैश्विक ज्ञान का भारतीयकरण और भारतीय ज्ञान का वैश्वीकरण ही नई शिक्षा नीति का मुख्य उद्देश्य है। केवल इतिहास का गौरवगान करने से देश आगे नहीं बढ़ेगा, बल्कि वर्तमान और भविष्य की वैश्विक चुनौतियों को ध्यान में रखकर शिक्षा प्रणाली को दिशा देना जरूरी है। मुख्यमंत्री फडणवीस नागपुर स्थित वीएनआईटी नागपुर में आयोजित ‘महाराष्ट्र ज्ञान सभा-2026 : विकसित महाराष्ट्र के लिए शिक्षा’ राष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। इस कार्यक्रम का आयोजन राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय, गोंडवाना विश्वविद्यालय, आईआईएम नागपुर और शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।उन्होंने कहा कि दुनिया तेजी से बदल रही है और पिछले 15 वर्षों में तीन औद्योगिक क्रांतियों का अनुभव हो चुका है। ऐसे में यदि बदलाव की गति को नहीं समझा गया तो देश पीछे रह सकता है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डीप टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में भारतीयों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है, और शिक्षा नीति के माध्यम से ऐसे मानव संसाधन तैयार करने की जरूरत है, जो नैतिकता, कौशल और व्यावसायिक क्षमता से परिपूर्ण हों।मुख्यमंत्री ने कहा कि आने वाले 1000 दिनों में करीब 60 प्रतिशत नौकरियों का स्वरूप बदल जाएगा। हालांकि, इससे बेरोजगारी बढ़ेगी ऐसा नहीं है, बल्कि नई तकनीकों के साथ खुद को ढालना जरूरी होगा। उन्होंने विश्वविद्यालयों और शिक्षकों से समय के अनुरूप पाठ्यक्रम तैयार करने का आह्वान किया। फडणवीस ने बताया कि नवी मुंबई में ‘एज्यु सिटी’ विकसित की जा रही है, जहां कम लागत में विदेशी विश्वविद्यालयों की शिक्षा उपलब्ध कराई जाएगी। साथ ही, भारतीय विश्वविद्यालयों को भी वैश्विक स्तर की प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार होने की आवश्यकता है। कार्यक्रम में विभिन्न गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति में स्मारिका और ‘बेस्ट प्रैक्टिसेस ऑफ गोंडवाना यूनिवर्सिटी’ पुस्तक का विमोचन भी किया गया। दो दिवसीय इस सम्मेलन में देशभर के शिक्षा और उद्योग क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ और प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं।




