
मुंबई। भारत के मुख्य न्यायाधीश भूषण गवई का बॉम्बे बार एसोसिएशन द्वारा भारत के प्रधान न्यायाधीश नियुक्त होने के उपलक्ष्य में शुक्रवार को आयोजित सम्मान समारोह में भावपूर्ण स्वागत किया गया। इस अवसर पर न्यायमूर्ति गवई ने कहा कि “मुंबई उच्च न्यायालय की यह इमारत, बॉम्बे बार एसोसिएशन और यहां के मेरे सहयोगियों ने मुझे गढ़ा है। आज मैं जो कुछ भी हूं, वह इन संस्थाओं की ही देन है। यह संस्था मेरे लिए एक परिवार जैसी है। न्यायपालिका को विवेकशील और मूल्यनिष्ठ व्यक्तित्व देने में बार एसोसिएशन की भूमिका मातृसंस्था जैसी रही है।” न्यायमूर्ति गवई ने उस ऐतिहासिक कोर्टरूम का उल्लेख किया जहां कभी लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने “स्वराज्य मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है” की उद्घोषणा की थी, और कहा कि वही स्थान आज उनके सम्मान का साक्षी बनकर उन्हें प्रेरणा दे रहा है। उन्होंने नागपुर, मुंबई, छत्रपति संभाजीनगर और गोवा खंडपीठों में अपने कार्यकाल के अनुभव साझा करते हुए कहा कि इन अनुभवों ने उनकी न्यायिक दृष्टि को परिपक्व करने में अहम भूमिका निभाई है। न्यायमूर्ति गवई ने कहा कि संविधान ही न्यायाधीशों के लिए सर्वोच्च मार्गदर्शक है और केवल अधिकार का नहीं बल्कि कर्तव्य का भी पालन करना उतना ही आवश्यक है। उन्होंने न्यायिक नियुक्तियों की प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने और लंबित मामलों पर नियंत्रण पाने के लिए समय पर पदों की पूर्ति की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने बॉम्बे बार एसोसिएशन द्वारा शुरू की गई ‘पॉडकास्ट सीरीज’ और ‘बीबीए ऐप’ की सराहना भी की। इस अवसर पर सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश दीपांकर दत्ता, मुंबई हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश आलोक आराधे, न्यायमूर्ति गवई की पत्नी डॉ. तेजस्विनी गवई, अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अनिल सिंह, राज्य के महाधिवक्ता वीरेंद्र सराफ, महाराष्ट्र-गोवा बार काउंसिल के अध्यक्ष विठ्ठल देशमुख, वेस्टर्न महाराष्ट्र एडवोकेट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रशांत रेळेकर, बार एसोसिएशन के अध्यक्ष नितीन ठक्कर, उपाध्यक्ष वी. आर. धोंड और सचिव फरहान दुभाष सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। इस अवसर पर न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता ने कहा कि न्यायमूर्ति गवई की विधिक गहराई, विनम्रता और गहन अध्ययन उन्हें पूरे देश में न्यायाधीशों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनाता है। उन्होंने कहा कि न्यायमूर्ति गवई का कार्यकाल ऐतिहासिक निर्णयों, शांत स्वभाव और सौम्य हास्यबुद्धि के लिए याद किया जाएगा। वहीं मुंबई हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश आलोक आराधे ने कहा कि न्यायमूर्ति गवई ने न्याय और जनसेवा को अपने जीवन का ध्येय माना है और उनके निर्णयों ने आमजन का न्यायपालिका में विश्वास मजबूत किया है। महाधिवक्ता सराफ और अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल सिंह ने भी अपने विचार साझा किए। बॉम्बे बार एसोसिएशन के अध्यक्ष नितीन ठक्कर ने स्वागत भाषण दिया और कार्यक्रम का संचालन सचिव फरहान दुभाष ने किया।




