
मुंबई। शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने भाजपा पर तीखा हमला करते हुए कहा कि मुंबई और महाराष्ट्र के महत्व को कम करने की सुनियोजित कोशिशें हो रही हैं। बाल ठाकरे और उनके भाई श्रीकांत द्वारा स्थापित पत्रिका मार्मिक के 65वें स्थापना दिवस पर बोलते हुए, उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय से अपील की कि वह महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष के उस फैसले पर विचार करे, जिसमें सत्तारूढ़ शिवसेना को ‘धनुष-बाण’ चुनाव चिह्न दिया गया था। ठाकरे ने चेतावनी दी कि यदि न्याय में देरी हुई तो लोकतंत्र के अस्तित्व पर ही संकट आ जाएगा। उन्होंने याद दिलाया कि 1966 में अविभाजित शिवसेना के गठन से पहले “मराठी मानुष” को बाहरी माना जाता था, और आज भी मुंबई व महाराष्ट्र को हाशिए पर धकेलने की कोशिशें जारी हैं। चाहे वह हिंदी थोपने के जरिये हो या राज्य की प्रमुखता घटाने के माध्यम से। ठाकरे ने स्पष्ट किया कि शिवसेना (यूबीटी) और ‘मार्मिक’ ऐसे प्रयासों का विरोध जारी रखेंगे। उन्होंने कबूतरों को दाना डालने और आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश जैसे मुद्दों को असली जन-समस्याओं से ध्यान भटकाने वाला करार दिया। हालांकि, उन्होंने आवारा कुत्तों से जुड़ी चिंताओं पर भारत के मुख्य न्यायाधीश भूषण गवई के रुख की सराहना की, और 11 अगस्त को दिए गए उस आदेश का हवाला दिया जिसमें दिल्ली-एनसीआर में आवारा कुत्तों को आश्रय स्थलों में भेजने का निर्देश दिया गया था। ठाकरे ने कहा कि जैसे अदालत ने इन याचिकाओं पर तुरंत संज्ञान लिया, वैसे ही ‘धनुष-बाण’ चिन्ह मामले पर भी त्वरित सुनवाई होनी चाहिए, क्योंकि देरी लोकतंत्र के लिए घातक साबित हो सकती है। जुलाई में न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने भी इस मामले की गंभीरता पर जोर दिया था।