
मुंबई। वन मंत्री गणेश नाईक ने निर्देश दिए हैं कि एक निश्चित आयु तक के वृक्षों वाले वन क्षेत्रों में भेड़ों को चराने की अनुमति दी जाए और ऐसे मामलों में चरवाहों के खिलाफ किसी भी प्रकार की गलत कार्रवाई न की जाए। यह निर्देश विधान भवन में राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले की अध्यक्षता में आयोजित एक बैठक में दिए गए, जिसमें सहकारिता मंत्री बाबासाहेब पाटिल, वन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव मिलिंद म्हैसकर तथा प्रहार जनशक्ति पक्ष के नेता बच्चू कडू भी उपस्थित थे। मंत्री नाईक ने कहा कि अब तक मानसून के चार महीनों के दौरान छोटे वृक्षों वाले क्षेत्रों में भेड़ों को चरने की अनुमति नहीं दी जाती थी, लेकिन चरवाहों की मांग को देखते हुए अब एक तय मानक के अनुसार ऐसे क्षेत्रों में चराई की अनुमति दी जाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि संबंधित वन अधिकारियों को निर्देश दिए जाएंगे कि कोई भी चरवाहा अनुचित कार्रवाई का शिकार न हो। उन्होंने सरकारी चारागाह, उपलब्ध भूमि और अन्य विकल्पों पर विचार कर चरवाहों को मानसून के दौरान सुरक्षित और नियोजित चराई की सुविधा देने का आश्वासन दिया। इस दौरान राजस्व मंत्री बावनकुले ने बताया कि सरकार बफर क्षेत्र में सौर ऊर्जा परियोजनाओं की स्थापना पर विचार कर रही है, जिससे वन्यजीवों की समस्या कम करने के साथ किसानों को आय का नया स्रोत भी मिलेगा। उन्होंने वन विभाग से बफर जोन में चारागाह विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया। वहीं पूर्व विधायक बच्चू कडू ने मांग की कि जंगली जानवरों द्वारा फसलों को पहुंचाए गए नुकसान का मुआवज़ा दोगुना किया जाए और समय पर भुगतान सुनिश्चित किया जाए। इस बैठक को ग्रामीण पशुपालकों के हित में एक अहम नीति निर्णय के रूप में देखा जा रहा है, जो पारंपरिक चरवाहा समुदाय को राहत और समर्थन प्रदान करेगा।




