
ओबीसी–एसटी के साथ अन्याय का आरोप, मुंबई मेयर पद ‘सामान्य–महिला’ के लिए आरक्षित
मुंबई। मुंबई स्थित मंत्रालय में गुरुवार को उस समय राजनीतिक तनाव बढ़ गया, जब शहरी विकास विभाग ने बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) सहित महाराष्ट्र के 29 नगर निगमों में मेयर पदों के आरक्षण के लिए लॉटरी निकाली। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) की नेता और मुंबई की पूर्व मेयर किशोरी पेडनेकर के नेतृत्व में विपक्ष ने विरोध जताते हुए वॉकआउट किया और इस प्रक्रिया को ओबीसी तथा अनुसूचित जनजाति (एसटी) समुदाय के साथ पक्षपातपूर्ण और अन्यायपूर्ण बताया। लॉटरी के बाद यह स्पष्ट हुआ कि अगले कार्यकाल में मुंबई मेयर का पद ‘सामान्य’ श्रेणी के लिए आरक्षित होगा। इस घोषणा के साथ ही विपक्षी नेताओं ने सरकार पर तीखा हमला बोला। किशोरी पेडनेकर ने आरोप लगाया कि लॉटरी प्रक्रिया के दौरान जानबूझकर ओबीसी बहुल इलाकों के प्रतिनिधियों को बाहर रखा गया। वॉकआउट के बाद पत्रकारों से बातचीत में पेडनेकर ने कहा, “मुंबई में कई ऐसे इलाके हैं जहां ओबीसी समुदाय की बड़ी आबादी रहती है, लेकिन लॉटरी में उनके प्रतिनिधियों के नाम वाली एक भी पर्ची शामिल नहीं की गई। यह गलत और अस्वीकार्य है।” उन्होंने दावा किया कि आरक्षण ड्रॉ पहले से तय मंशा के साथ किया गया और यह ओबीसी व एसटी समुदाय के साथ सीधा अन्याय है। उन्होंने कहा कि विपक्ष इस फैसले का लगातार विरोध करता रहेगा। विवाद के बावजूद, आरक्षण लॉटरी ने मुंबई के ‘पहले नागरिक’ की हाई-प्रोफाइल दौड़ का रास्ता साफ कर दिया है। मेयर पद सामान्य श्रेणी के लिए आरक्षित होने और मौजूदा रोटेशन नीति के अनुसार, बीएमसी में अगले कार्यकाल में एक महिला मेयर बनने की संभावना जताई जा रही है। मेयर का औपचारिक चुनाव 28 जनवरी को होगा, जिसमें नव-निर्वाचित 227 पार्षद मतदान करेंगे। इसी लॉटरी के तहत राज्य के विभिन्न नगर निगमों के मेयर पदों के लिए आरक्षण तय किया गया। इसके अनुसार बृहन्मुंबई में सामान्य–महिला, ठाणे में अनुसूचित जाति, कल्याण-डोंबिवली में अनुसूचित जनजाति (पुरुष), नवी मुंबई, मीरा-भयंदर, पुणे, नागपुर, नासिक, धुले, जलगांव, मालेगांव और नांदेड़-वाघाला में सामान्य–महिला, जबकि उल्हासनगर, अहिल्यानगर, अकोला, चंद्रपुर, कोल्हापुर, इचलकरंजी और पनवेल जैसे नगर निगमों में ओबीसी वर्ग के लिए मेयर पद आरक्षित किया गया है। लातूर और जालना में अनुसूचित जाति वर्ग के लिए महिला मेयर का प्रावधान किया गया है। आरक्षण की यह घोषणा ऐसे समय पर हुई है, जब मुंबई की नगर राजनीति में बड़ा बदलाव देखा गया है। 15 जनवरी को हुए बीएमसी चुनावों में करीब तीन दशकों बाद उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना को सत्ता से बाहर होना पड़ा। 16 जनवरी को घोषित अंतिम नतीजों के अनुसार, भारतीय जनता पार्टी 89 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, जबकि उसकी सहयोगी एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना को 29 सीटें मिलीं।




