
लोक प्रशासन संस्था के प्रशिक्षण वर्ग में ‘डीपीडीपी’ कानून पर मार्गदर्शन
मुंबई। डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (डीपीडीपी) अधिनियम, 2023 नागरिक-केंद्रित कानून है। इस कानून के अंतर्गत नागरिकों को अपनी व्यक्तिगत जानकारी सुरक्षित रखने का अधिकार प्राप्त होगा तथा उनकी व्यक्तिगत जानकारी संबंधित नागरिक की सहमति के बिना उपयोग में नहीं लाई जा सकेगी। इस कानून के कारण प्रत्येक नागरिक की डिजिटल जानकारी का संरक्षण होगा और व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए इस जानकारी का उपयोग रोका जा सकेगा, ऐसा विश्वास सूचना एवं जनसंपर्क महासंचालनालय के प्रधान सचिव तथा महासंचालक ब्रिजेश सिंह ने व्यक्त किया। शुक्रवार को मंत्रालय के परिषद सभागार में भारतीय लोक प्रशासन संस्थान द्वारा आयोजित प्रशिक्षण वर्ग में ‘डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन अधिनियम, 2023 और शासकीय अधिकारियों की भूमिका व जिम्मेदारियां’ विषय पर प्रधान सचिव ब्रिजेश सिंह मार्गदर्शन कर रहे थे। इस अवसर पर मंच पर लोक प्रशासन संस्थान के अध्यक्ष स्वाधीन क्षत्रिय तथा मानद कोषाध्यक्ष विनायक देवधर उपस्थित थे। प्रधान सचिव ब्रिजेश सिंह ने कहा कि वर्तमान में विश्व में साइबर अपराध के माध्यम से एक बड़ी अर्थव्यवस्था विकसित हो चुकी है। इसका आकार भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) से दोगुना है। इससे साइबर अपराध से होने वाले लेन-देन की व्यापकता का अंदाजा लगाया जा सकता है। नए डीपीडीपी कानून के कारण नागरिकों की जानकारी संरक्षित होगी और व्यावसायिक रूप से उसका उपयोग संभव नहीं होगा। हालांकि, शासन लोककल्याणकारी उद्देश्यों से योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए जानकारी का उपयोग कर सकेगा। डीपीडीपी कानून मई 2027 से लागू होगा। इससे पूर्व कानून की प्रावधानों के अनुसार विभागों को विभिन्न कार्यान्वयन तंत्र स्थापित करने के लिए समय दिया गया है। कानून लागू होने के बाद किसी योजना के लिए उपयोग में लाई जाने वाली नागरिकों की व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा की जिम्मेदारी संबंधित तंत्र की होगी। किसी की भी व्यक्तिगत जानकारी सोशल मीडिया, ईमेल आदि माध्यमों से साझा नहीं की जा सकेगी। ‘डेटा ब्रीच’ होने की स्थिति में संबंधितों पर दंड लगाया जाएगा। व्यक्तिगत जानकारी साझा नहीं की जा सकेगी, किंतु समेकित जानकारी सांख्यिकीय स्वरूप में दी जा सकेगी, यह जानकारी भी प्रधान सचिव ब्रिजेश सिंह ने दी। उन्होंने आगे कहा कि इस कानून के अनुसार व्यक्तिगत जानकारी प्राप्त करने से पूर्व संबंधित नागरिक को पूर्व सूचना देना आवश्यक होगा। उसकी सहमति प्राप्त करने के बाद ही जानकारी का उपयोग किया जा सकेगा। साथ ही, जिस उद्देश्य से जानकारी प्राप्त की गई है, उसी उद्देश्य के लिए उसका उपयोग किया जा सकेगा। इसके लिए जानकारी प्राप्त करने का उद्देश्य, नागरिक की पसंद व सहमति तथा जानकारी के संग्रह पर सीमाएं अत्यंत महत्वपूर्ण होंगी। प्रशिक्षण के दौरान उपस्थित अधिकारियों को प्रश्न पूछने का अवसर दिया गया और उनके प्रश्नों का समाधान किया गया। प्रशिक्षण सत्र के अंत में कानून पर आधारित प्रश्नावली प्रस्तुत कर उसके उत्तर भी लिए गए। यह प्रशिक्षण सत्र संवादात्मक स्वरूप में आयोजित किया गया। अध्यक्ष स्वाधीन क्षत्रिय ने प्रशिक्षण वर्ग के प्रति संतोष व्यक्त करते हुए आभार प्रकट किया। प्रशिक्षण वर्ग में अधिकारी उपस्थित थे।




