Monday, April 13, 2026
Google search engine
HomeMaharashtraसांस्कृतिक पहचान का हवाला: महाराष्ट्र में ऑटो-टैक्सी चालकों के लिए मराठी अनिवार्य

सांस्कृतिक पहचान का हवाला: महाराष्ट्र में ऑटो-टैक्सी चालकों के लिए मराठी अनिवार्य

मुंबई। महाराष्ट्र सरकार द्वारा ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा का ज्ञान अनिवार्य करने के फैसले पर मंत्री प्रताप सरनाइक ने स्पष्ट किया है कि यह कदम राज्य की सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया गया है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में काम करने वाले हर व्यक्ति को स्थानीय भाषा का ज्ञान होना आवश्यक है।इस निर्णय को लेकर उठ रही चिंताओं के बीच सरनाइक ने कहा कि राज्य में रोजगार करने के इच्छुक लोगों को मराठी सीखना ही होगा, क्योंकि यह यहां की संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने बताया कि राज्य में बड़ी संख्या में हिंदी भाषी चालक, Ola, Uber और Rapido जैसे ऐप-आधारित प्लेटफॉर्म्स से जुड़कर ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चला रहे हैं। ऐसे चालकों के लिए वैध लाइसेंस और बैज अनिवार्य होने के साथ अब मराठी भाषा का ज्ञान भी आवश्यक कर दिया गया है। इस फैसले के बाद भाषा, आजीविका और क्षेत्रीय पहचान को लेकर व्यापक बहस छिड़ गई है, खासकर महाराष्ट्र जैसे राज्य में जहां बड़ी संख्या में प्रवासी कामगार परिवहन और सेवा क्षेत्र से जुड़े हुए हैं। इसी बीच मीरा रोड-भायंदर क्षेत्र में परिवहन विभाग ने बड़े स्तर पर सत्यापन अभियान शुरू किया है। क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) के नेतृत्व में चल रहे इस अभियान के तहत 12,000 से अधिक ऑटो-रिक्शा और टैक्सी परमिट धारकों की जांच की जा रही है। यह अभियान कई चरणों में पूरा किया जाएगा और 1 मई, महाराष्ट्र दिवस तक जारी रहेगा, जिसके बाद विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी। जांच प्रक्रिया के दौरान चालकों को अपने सभी वैध दस्तावेज प्रस्तुत करने के साथ-साथ मराठी भाषा की बुनियादी जानकारी भी साबित करनी होगी। आरटीओ में चालकों की पढ़ने और लिखने की क्षमता का परीक्षण किया जा रहा है, जिसमें छोटे अनुच्छेद लिखवाना भी शामिल है। यह प्रक्रिया 2019 में संशोधित ‘महाराष्ट्र मोटर वाहन नियमों’ के तहत लागू प्रावधानों के अनुरूप की जा रही है।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments