
मुंबई। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने दिव्यांगजनों के जीवन में समृद्धि और आत्मनिर्भरता लाने हेतु नीतिगत फैसलों के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया है। सह्याद्री अतिथिगृह में आयोजित एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में दिव्यांगजनों की समस्याओं पर चर्चा करते हुए उन्होंने संबंधित विभागों को समयानुकूल नई योजनाएं बनाने के निर्देश दिए। बैठक में उपमुख्यमंत्री अजित पवार, पूर्व राज्यमंत्री ओमप्रकाश उर्फ बच्चू कडू और मुख्य सचिव सुजाता सौनिक सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
दिव्यांगों के लिए रोजगार नीति और कौशल प्रशिक्षण
राज्य सरकार दिव्यांगजनों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने हेतु विशेष रोजगार नीति तैयार करेगी। इसके तहत कौशल विकास, रोजगार और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे। कौशल विकास व उद्योग विभाग को इस बाबत आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। दिव्यांगों को सीधे बैंक खातों में डीबीटी प्रणाली से आर्थिक सहायता दी जाएगी, जैसे ‘लाडकी बहन’ योजना में किया गया है। सहायता राशि में वृद्धि को लेकर सरकार सकारात्मक दृष्टिकोण रखती है।
दिव्यांग प्रमाणपत्र के लिए विशेष अभियान
राज्य में दिव्यांग प्रमाणपत्रों की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु विशेष अभियान चलाया जाएगा, जिससे दिव्यांगजनों को सरकारी योजनाओं, नौकरी, शिक्षा, रियायतों और स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिल सके। यह कार्य स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा विभाग के माध्यम से किया जाएगा। राज्य के सभी विश्वविद्यालयों में दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए अनुकूल अधोसंरचना, सहायक उपकरण, मार्गदर्शन केंद्र और परामर्श सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इस संबंध में उच्च व तकनीकी शिक्षा विभाग प्रस्ताव कैबिनेट के सामने रखेगा। पात्र दिव्यांगों को अंत्योदय अन्न योजना में शामिल किया जाएगा, और नई योजना के माध्यम से अपात्र दिव्यांगों को भी शामिल करने की तैयारी है। वर्ष 2025-26 से प्रत्येक जिला वार्षिक योजना में 1% निधि दिव्यांगजनों के लिए आरक्षित की जाएगी, जिससे ‘दिव्यांग भवन’ जैसी संरचनाएं स्थापित की जाएंगी।
स्वतंत्र घरकुल योजना और आवास सहायता
जिन दिव्यांगों के पास अपनी भूमि नहीं है, उनके लिए सरकार घर निर्माण हेतु आवश्यक भूमि उपलब्ध कराने में मदद करेगी और एक स्वतंत्र आवास योजना की शुरुआत की जाएगी। बैठक में दिव्यांग महामंडल के माध्यम से कर्जमाफी, शासकीय रुग्णालयों में गुणवत्तापूर्ण औषधियों की उपलब्धता, विभागीय बजट का 5 प्रतिशत दिव्यांग कल्याण पर खर्च करने, प्रशिक्षण-सह-खेल स्टेडियम, मानधन पदों में प्राथमिकता, समिति सदस्य नियुक्ति और राज्यस्तरीय दिव्यांग महोत्सव जैसे विषयों पर भी सकारात्मक निर्णय लिए गए। इस पहल से स्पष्ट है कि राज्य सरकार दिव्यांगजनों के सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक सशक्तिकरण के लिए गंभीर और प्रतिबद्ध है।




