
मुंबई। जनगणना विकास नियोजन की मजबूत आधारशिला है और वर्ष 2027 की जनगणना पूर्णतः डिजिटल माध्यम से आयोजित की जाएगी। इसे राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप पारदर्शी, सटीक और निर्धारित समयसीमा में संपन्न करने के लिए सभी विभागों को तैयार रहना चाहिए। यह आह्वान मृत्युंजय कुमार नारायण, महारजिस्ट्रार एवं जनगणना आयुक्त, ने जनगणना 2027 के संदर्भ में आयोजित राज्यस्तरीय सम्मेलन में किया। सह्याद्री राज्य अतिथि गृह में आयोजित इस सम्मेलन में मृत्युंजय कुमार नारायण एवं मुख्य सचिव राजेश अग्रवाल ने दूरदृश्य प्रणाली के माध्यम से मार्गदर्शन किया। इस अवसर पर अतिरिक्त मुख्य सचिव सीमा व्यास, संचालक एवं प्रधान जनगणना अधिकारी डॉ. निरुपमा जे. डांगे सहित विभागीय आयुक्त, जिलाधिकारी, महानगरपालिका आयुक्त और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। श्री नारायण ने जनगणना के संवैधानिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि लोकसभा और विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों के पुनर्निर्धारण, वित्त आयोग की सिफारिशें तथा केंद्र और राज्य सरकार की अनेक योजनाएँ जनगणना के आंकड़ों पर आधारित होती हैं। इसलिए संकलित जानकारी का गुणवत्तापूर्ण और विश्वसनीय होना अत्यंत आवश्यक है। वर्ष 2011 के बाद 16 वर्षों के अंतराल पर आयोजित की जा रही यह जनगणना विशेष महत्व रखती है। इसमें शामिल सभी अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारियाँ स्पष्ट रूप से निर्धारित की गई हैं।
विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में जनगणना 2027 का डेटा महत्वपूर्ण – राजेश अग्रवाल
मुख्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि जनगणना 2027 को अधिक पारदर्शी और तकनीक-आधारित पद्धति से संचालित किया जाएगा। इससे प्राप्त आंकड़े आयुष्मान भारत–प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना सहित विभिन्न विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में सहायक सिद्ध होंगे। इसलिए विभागीय आयुक्त, जिलाधिकारी, महानगरपालिका आयुक्त तथा संबंधित अधिकारियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। जनगणना प्रक्रिया भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार संचालित की जाएगी। लगभग 2.64 लाख प्रगणक और पर्यवेक्षक मोबाइल उपकरणों के माध्यम से जानकारी सीधे जनगणना प्रबंधन एवं निगरानी प्रणाली में दर्ज करेंगे, जिससे विलंब की संभावना समाप्त होगी। नागरिकों को प्रगणकों के आगमन से पूर्व स्व-गणना (सेल्फ-एन्यूमरेशन) की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी।




