
मुंबई। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के एक लेखा अधिकारी के खिलाफ गंभीर भ्रष्टाचार के आरोपों में मामला दर्ज किया है। आरोप है कि अधिकारी ने पुणे की एक परामर्श सेवा कंपनी के माध्यम से निजी संस्थाओं द्वारा प्रस्तुत ईपीएफ दावों को अनुचित रूप से मंजूरी देने के एवज में अनुचित लाभ प्राप्त किया। यह परामर्श फर्म अधिकारी के एक रिश्तेदार के नाम पर चल रही थी और उसी के आवासीय पते से संचालित हो रही थी। सीबीआई के अनुसार, यह मामला 2019 से 2025 तक की अवधि में सामने आया है जब अकुर्दी (पुणे) स्थित क्षेत्रीय कार्यालय में तैनात इस लेखा अधिकारी ने ईपीएफओ दावों को संसाधित करने में अपनी आधिकारिक स्थिति का दुरुपयोग किया। जांच में पाया गया कि कई निजी संस्थाओं ने फर्जी या पक्षपातपूर्ण लाभ प्राप्त करने के लिए परामर्शदाता कंपनी के बैंक खातों में बड़ी रकम जमा करवाई थी। सीबीआई अधिकारी ने बताया, प्रथम दृष्टया, यह स्पष्ट है कि अधिकारी ने परामर्श सेवा की आड़ में एक रिश्तेदार के जरिए निजी संस्थाओं से अनैतिक लाभ लेने की योजना बनाई और इसे क्रियान्वित किया। इस कृत्य को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत गंभीर अपराध माना गया है। सीबीआई ने लोक सेवक द्वारा पद के दुरुपयोग, अनुचित लाभ की स्वीकार्यता, और बेईमानी से कार्य निष्पादन जैसे प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया है। इस मामले की गंभीर जांच जारी है और संबंधित निजी संस्थाओं की भूमिका की भी जांच की जा रही है। यह कार्रवाई सरकारी तंत्र में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और भ्रष्टाचार के खिलाफ कठोर रुख अपनाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।




