Tuesday, February 17, 2026
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महाराष्ट्र के संतों की परंपरा ने दी समता और एकता की सीख : छगन भुजबल

मुंबई। महाराष्ट्र संतों की भूमि है, जहाँ संत चोखा मेला, संत जनाबाई, संत नामदेव सहित अनेक संतों ने जाति-पाति के भेद मिटाकर समाज में समता, दया, क्षमा, करुणा और प्रेम का संदेश दिया। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री छगन भुजबल ने कहा कि संतों का धर्म समाज में व्याप्त भेदों को दूर कर एकता का संदेश देना है। वे वारकरी साहित्य परिषद द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रहे थे, जिसमें राज्य के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में वारकरी भक्त मौजूद थे। कार्यक्रम में मराठी भाषा और उद्योग मंत्री उदय सामंत ने वारी को विश्व की सबसे बड़ी आध्यात्मिक परंपरा बताते हुए कहा कि वारकरी साहित्य सम्मेलन के लिए पूर्ण सहयोग दिया गया है। ज्ञानेश्वरी और तुकाराम गाथा को घर-घर पहुँचाने के लिए एक-एक करोड़ रुपये की निधि दी गई है। उन्होंने पैठण में संतपीठ और रामटेक संस्कृत विश्वविद्यालय की स्थापना का भी उल्लेख किया और बताया कि इस वर्ष राज्य के कीर्तनकारों के नाम पद्म पुरस्कार के लिए भेजे गए हैं। सामाजिक न्याय मंत्री संजय शिरसाट ने कहा कि वारकरी समाज सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने और समाज के कल्याण के लिए सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है। उन्होंने बताया कि वारी में भाग लेने वाली प्रत्येक दिंडी को 20-20 हजार रुपये की सहायता दी जाएगी, जो पहले वर्ष में 1200 और दूसरे वर्ष में 1400 दिंडियों को प्रदान की गई थी। उन्होंने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को इस निर्णय के लिए सम्मानित करने का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार संतों की परंपरा को संरक्षित करने के लिए प्रतिबद्ध है। कार्यक्रम में मंत्री छगन भुजबल, मंत्री उदय सामंत और मंत्री संजय शिरसाट को वारकरी साहित्य परिषद की ओर से विठ्ठल मूर्ति की प्रतिकृति, स्मृति चिन्ह और शॉल भेंट कर सम्मानित किया गया।

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