
मुंबई। विधानसभा अध्यक्ष एडवोकेट राहुल नार्वेकर ने प्राक्कलन समिति के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि संविधान निर्माताओं की दृष्टि के अनुसार वित्तीय अनुशासन, पारदर्शिता और लोक कल्याण के मूल्यों का प्रभावी क्रियान्वयन ही सशक्त संवैधानिक व्यवस्था की नींव है, और इसका प्रमुख माध्यम प्राक्कलन समिति है। उन्होंने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज द्वारा स्थापित लोकोन्मुखी राज्य व्यवस्था को छत्रपति शाहू महाराज ने सामाजिक समानता के दर्शन से सशक्त किया, जिसे डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर द्वारा दिए गए संवैधानिक आधार ने स्थायित्व प्रदान किया। यही परंपरा आज भी प्राक्कलन समिति के कार्यों के माध्यम से जीवंत है।
श्री नार्वेकर ने कहा कि प्राक्कलन समिति की रिपोर्टों में सरकार की आर्थिक नीतियों का गहन विश्लेषण होता है और उनके आधार पर तैयार किया गया बजट वित्तीय अनुशासन और सामाजिक विकास के लिए दिशासूचक बनता है। यह केवल प्रशासन का कार्य नहीं बल्कि सरकार का संवैधानिक और नैतिक दायित्व है कि इन सिफारिशों के अनुरूप संतुलित, प्रभावी और समावेशी योजनाएं लागू की जाएं। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि संसदीय समितियों का मार्गदर्शन राज्य और केंद्र सरकारों को योजनाओं के सफल कार्यान्वयन में मदद करता है।
प्राक्कलन समिति एक शक्तिशाली संसदीय निकाय है जो न केवल खर्च की निगरानी करती है, बल्कि योजनाओं के क्रियान्वयन की गुणवत्ता और प्रभावशीलता पर भी ध्यान देती है। यह समिति आम नागरिकों की जरूरतों के अनुरूप संसाधनों के उचित प्रबंधन और जोखिमों के नियंत्रण हेतु मार्गदर्शन प्रदान करती है। श्री नार्वेकर के अनुसार, यह तंत्र सरकार की जवाबदेही सुनिश्चित करने और लोक कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।




