Monday, March 30, 2026
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मदद के नाम पर दरिंदगी: कानपुर में 15 साल की मासूम से 5 घंटे तक गैंगरेप, मां से लिपटकर फूट-फूटकर रोई बेटी!

कानपुर (इंद्र यादव)। उत्तर प्रदेश के कानपुर के मंधना (बिठूर) इलाके से इंसानियत को शर्मसार करने वाली एक रूह कंपा देने वाली घटना सामने आई है। वाराणसी की रहने वाली एक 15 साल की मासूम बच्ची, जो किसी काम से कानपुर आई थी, वह इन दरिंदों की हवस का शिकार बन गई। मदद के नाम पर उसे जिस तरह छला गया, उसने पूरे समाज को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
भरोसे का कत्ल: वह काली रात
घटना पिछले मंगलवार की आधी रात की है। वाराणसी की वह बच्ची मंधना इलाके में अकेली थी। तभी उसे पदम त्रिपाठी नाम का एक युवक मिला। उसने बड़ी ही मासूमियत से बच्ची को अपनी बातों में फंसाया और कहा कि वह उसे रात रुकने के लिए एक सुरक्षित कमरा (हॉस्टल) दिला देगा। बच्ची को लगा कि शायद यह शख्स उसकी मदद कर रहा है, लेकिन उसे क्या पता था कि वह मौत के साये में जा रही है।
5 घंटे तक चलता रहा हैवानियत का तांडव
रात के करीब 12 बजे पदम त्रिपाठी उस बच्ची को एक हॉस्टल के कमरे में ले गया। वहां पहुंचते ही उसने अपने दो और दोस्तों—निहाल सिंह और नितेश दुबे (उर्फ बिल्लू) को फोन करके बुला लिया। इसके बाद उन तीनों ने जो किया, वह सुनकर किसी का भी कलेजा फट जाए। उन तीनों ने मिलकर मासूम को कमरे में बंधक बना लिया। करीब 5 घंटे तक उसके साथ बारी-बारी से गैंगरेप किया। वह बच्ची गिड़गिड़ाती रही, छोड़ देने की मिन्नतें करती रही, लेकिन उन हैवानों को जरा भी दया नहीं आई। वारदात के बाद वे तीनों दरिंदे मासूम को उसी हालत में कमरे में तड़पता छोड़कर भाग निकले।
कोर्ट में टूटी मासूम की हिम्मत
शनिवार को इस मामले की सुनवाई कोर्ट में हुई। जब 15 साल की उस पीड़ित बच्ची को अपर सिविल जज (जूनियर डिवीजन) की अदालत में पेश किया गया, तो वहां सन्नाटा पसर गया। उस छोटी सी बच्ची ने कांपते हुए और रुंधे गले से अपनी पूरी आपबीती सुनाई। उसके शब्दों ने वहां मौजूद हर शख्स की आंखों को नम कर दिया।
मां से लिपटकर फूट-फूटकर रोई बेटी
इस पूरी घटना का सबसे दर्दनाक मंजर बिठूर थाने में देखने को मिला। जब बच्ची के माता-पिता वाराणसी से कानपुर पहुंचे और अपनी बेटी के सामने आए, तो वह बच्ची अपनी मां को देखते ही उनसे लिपट गई। वह अपनी मां की गोद में सिर रखकर काफी देर तक फूट-फूटकर रोती रही। उसकी चीखें बता रही थीं कि उन 5 घंटों में उसने कितनी बड़ी पीड़ा सही है।
समाज के लिए बड़े सवाल
क्या हमारी बेटियां मदद मांगने के लिए भी किसी अजनबी पर भरोसा नहीं कर सकतीं! हॉस्टल जैसे सुरक्षित स्थानों पर ऐसे अपराधी बेखौफ होकर वारदातों को अंजाम कैसे दे रहे हैं? आखिर कब तक हमारी बहन-बेटियां इन दरिंदों का शिकार होती रहेंगी! कानून की धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस आरोपियों की तलाश में जुटी है। समाज अब केवल एक ही मांग कर रहा है—इन हैवानों को ऐसी सख्त सजा मिले कि फिर कभी किसी मासूम की रूह न कांपे।

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