Wednesday, February 4, 2026
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वायु प्रदूषण पर बॉम्बे हाई कोर्ट सख्त: आदेशों की अनदेखी पर बीएमसी–एनएमएमसी को कड़ी फटकार


नियमों का पालन नहीं किया तो शीर्ष अधिकारियों की सैलरी रोके जाने की चेतावनी,
कहा—हम सब एक ही हवा में सांस ले रहे हैं

मुंबई। बॉम्बे हाई कोर्ट ने गुरुवार को वायु प्रदूषण नियंत्रण को लेकर अपने पूर्व आदेशों की “जानबूझकर अनदेखी” करने पर बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) और नवी मुंबई नगर निगम (एनएमएमसी) को कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि यदि नियमों का पालन नहीं किया गया तो शीर्ष सिविक अधिकारियों की सैलरी रोकी जा सकती है। मुख्य न्यायाधीश श्री चंद्रशेखर और न्यायमूर्ति श्याम सुमन की खंडपीठ ने कहा कि वायु प्रदूषण एक साझा जिम्मेदारी है और इससे कोई भी अछूता नहीं है। पीठ ने टिप्पणी की, “आप भी किसी दूसरी दुनिया में नहीं रहते हैं। हम सब एक ही हवा में सांस ले रहे हैं।”
गौरतलब है कि वर्ष 2023 में बॉम्बे हाई कोर्ट ने बढ़ते वायु प्रदूषण का स्वतः संज्ञान लेते हुए नगर निकायों और संबंधित विभागों को प्रदूषण कम करने के लिए ठोस कदम उठाने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद एनएमएमसी कमिश्नर द्वारा कोर्ट के आदेशों के अनुसार व्यक्तिगत हलफनामा (पर्सनल एफिडेविट) दाखिल नहीं किए जाने पर अदालत ने गंभीर नाराज़गी जताई। कोर्ट ने कहा कि एनएमएमसी कमिश्नर द्वारा इस कोर्ट के आदेशों की जानबूझकर अनदेखी की गई है और यह भी स्पष्ट किया कि अगले आदेश तक उनकी सैलरी रोकने का निर्देश दिया जा सकता है। कोर्ट की नियुक्त समिति ने कुल 36 स्थानों का निरीक्षण किया, जहां वायु प्रदूषण नियंत्रण उपायों का उल्लंघन पाया गया। इनमें से 25 स्थान मुंबई में हैं, जिनमें बीएमसी के अंतर्गत प्रस्तावित नए हाई कोर्ट कॉम्प्लेक्स की साइट भी शामिल है। शेष 11 स्थान नवी मुंबई में हैं। हालांकि एनएमएमसी ने दावा किया कि इन स्थानों का निरीक्षण कर कार्रवाई की गई है, लेकिन सिटी इंजीनियर द्वारा दाखिल हलफनामे में ऐसी किसी कार्रवाई का “कोई स्पष्ट संकेत नहीं” मिला। इस पर कोर्ट ने अधिकारियों की एक नई टीम को उन 11 स्थानों का दोबारा निरीक्षण करने का निर्देश दिया। बीएमसी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता*एस.यू. कामदार ने दलील दी कि जिन 600 स्थानों पर एयर क्वालिटी मॉनिटर लगाए जाने थे, उनमें से लगभग 400 स्थानों पर उपकरण स्थापित कर दिए गए हैं और कई निर्माण स्थलों पर काम रोकने के नोटिस भी जारी किए गए हैं। हालांकि कोर्ट इस दलील से संतुष्ट नहीं हुआ। पीठ ने तीखे शब्दों में सवाल किया, “एक बात साफ है—इस कोर्ट के आदेशों के बाद ही आपने कदम उठाने शुरू किए। पिछले छह महीनों से आप क्या कर रहे थे?
साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा- नगर निगम चलाना कोर्ट का काम नहीं है। नियमों का पालन करना आपकी कानूनी जिम्मेदारी है। कोर्ट ने बीएमसी को भी चेतावनी देते हुए कहा कि आदेशों की अनदेखी जारी रही तो उनकी सैलरी भी रोकी जा सकती है। इसके साथ ही बीएमसी को निर्देश दिया गया कि वह नवंबर 2025 से तीन महीने पहले तक का रोजाना एयर क्वालिटी सेंसर डेटा, साथ ही सेंसर इंस्टॉलेशन और सेंट्रल कनेक्टिविटी की महीनेवार जानकारी रिकॉर्ड पर पेश करे। कोर्ट ने स्पष्ट किया, हमें सिर्फ आंकड़े चाहिए। ये आंकड़े अपनी कहानी खुद बताएंगे।
इस दौरान अधिवक्ता गुलनार मिस्त्री और पूजा थोरात ने निजी एयर क्वालिटी रीडिंग और बीएमसी के आधिकारिक डेटा के बीच अंतर को उजागर किया। उन्होंने मुंबई मैराथन के दिन की वायु गुणवत्ता रीडिंग का भी हवाला दिया और कहा कि केवल प्रतिक्रिया देने के बजाय मुंबई के लिए एक ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान की जरूरत है। गुलनार मिस्त्री ने तर्क दिया, मुंबई के लिए टियर और स्टेज आधारित फ्रेमवर्क जरूरी है। हमें दिल्ली जैसी स्थिति बनने से पहले कदम उठाने होंगे। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि बीएमसी द्वारा दाखिल हलफनामों में वार्ड-वार विवरण और जवाबदेही का अभाव है, जिससे यह प्रतीत होता है कि बीएमसी द्वारा कोई वास्तविक और ईमानदार प्रयास नहीं किया गया है। पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि वायु प्रदूषण एक अत्यंत गंभीर मुद्दा है और नागरिक निकायों के पास प्रदूषण फैलाने वालों के खिलाफ मिसाल कायम करने वाले जुर्माने लगाने की पर्याप्त शक्तियां हैं, जिनका प्रभावी इस्तेमाल किया जाना चाहिए। मामले की अगली सुनवाई 27 जनवरी को निर्धारित की गई है।

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