
मुंबई। बॉम्बे उच्च न्यायालय ने महाराष्ट्र और गोवा बार काउंसिल (बीसीएमजी) द्वारा अन्य राज्यों से वकीलों के नामांकन स्थानांतरण के लिए वसूले जाने वाले शुल्क को अवैध घोषित कर दिया है। न्यायमूर्ति सुमन श्याम और श्याम चांडक की खंडपीठ ने अधिवक्ता देवेंद्र नाथ त्रिपाठी की रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्णय दिया। त्रिपाठी ने 2013 में उत्तर प्रदेश बार काउंसिल से बीसीएमजी में नामांकन स्थानांतरण के लिए 15,405 रुपये का शुल्क चुकाया था और इसे अधिवक्ता अधिनियम, 1961 की धारा 18 के विरुद्ध बताते हुए चुनौती दी। उन्होंने तर्क दिया कि इस धारा के अनुसार स्थानांतरण निःशुल्क होना चाहिए। इसके बावजूद, बीसीएमजी ने उत्तर प्रदेश बार काउंसिल के लिए 1,900 रुपये, बीसीएमजी के लिए 11,490 रुपये और बार काउंसिल ऑफ इंडिया के लिए 2,015 रुपये का शुल्क लिया। यह शुल्क 2010 के एक संकल्प के आधार पर वसूला गया था, जिसे त्रिपाठी ने कानूनी रूप से असंगत बताया। न्यायालय ने सर्वोच्च न्यायालय के एक पूर्व निर्णय का हवाला देते हुए कहा कि बार काउंसिल अधिवक्ता अधिनियम में स्पष्ट अनुमति के बिना कोई शुल्क नहीं वसूल सकती। अदालत ने बीसीएमजी द्वारा वसूला गया स्थानांतरण शुल्क धारा 18(1) का उल्लंघन करार दिया और इसे अवैध घोषित किया। हालाँकि, चूँकि त्रिपाठी ने धनवापसी की मांग नहीं की थी, इसलिए अदालत ने इस निर्णय को केवल भावी प्रभाव से लागू करने का निर्देश दिया और याचिका का निपटारा कर दिया।




