
मुंबई। बॉम्बे हाई कोर्ट ने बुधवार को स्पष्ट किया कि वह गेटवे ऑफ इंडिया के पास प्रस्तावित यात्री जेटी और टर्मिनल सुविधाओं से संबंधित निर्माण कार्य पर रोक लगाने को तैयार नहीं है। अदालत ने कहा कि यह परियोजना “जनहित में है” और इसे उचित प्रशासनिक अनुमोदनों के साथ आगे बढ़ाया गया है। मुख्य न्यायाधीश आलोक अराधे और न्यायमूर्ति एम.एस.कार्णिक की खंडपीठ क्लीन एंड हेरिटेज कोलाबा रेजिडेंट्स एसोसिएशन (CHCRA) द्वारा दायर एक अंतरिम आवेदन पर सुनवाई कर रही थी। एसोसिएशन ने आरोप लगाया था कि अधिकारियों ने 20 जून से पहले समुद्र की दीवार नहीं गिराने का आश्वासन दिया था, फिर भी 3 मई को पाइलिंग कार्य शुरू कर दिया गया, जो पहले दिए गए वचनों का उल्लंघन है। CHCRA के वकील एस्पी चेनॉय ने तर्क दिया कि एक बार पाइलिंग पूरी हो जाने पर, उसे हटाना लगभग असंभव हो जाएगा और इससे याचिका का उद्देश्य ही विफल हो जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि यह काम आस-पास की विरासत इमारतों को नुकसान पहुँचा सकता है। इस पर राज्य के महाधिवक्ता बीरेंद्र सराफ ने अदालत को बताया कि परियोजना की प्रक्रिया जुलाई 2024 में शुरू की गई थी, और 11 अक्टूबर 2024 को कार्य आदेश जारी किया गया था। उन्होंने दावा किया कि याचिकाकर्ता पहले से जानते थे कि परियोजना में पाइलिंग शामिल है, और उन्होंने समुद्र की ओर से काम शुरू होने पर कोई आपत्ति नहीं जताई थी। पीठ ने यह कहते हुए निर्माण रोकने से इनकार कर दिया कि “इस बिंदु पर, हम काम को रोकने के इच्छुक नहीं हैं। यह एक सार्वजनिक परियोजना है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि कार्य याचिका के अंतिम निर्णय के अधीन जारी रहेगा और अब मामले की अगली सुनवाई 16 जून को होगी।
एक ही मुद्दे पर कई याचिकाओं पर सवाल
सुनवाई के दौरान इसी परियोजना पर एक अन्य जनहित याचिका पर भी सुनवाई हुई, जिसे कोलाबा और कफ परेड के तीन निवासियों ने दायर किया था। इस पर पीठ ने सवाल उठाया कि एक ही मुद्दे पर इतनी सारी याचिकाएं क्यों दायर की जा रही हैं। मुख्य न्यायाधीश अराधे ने कहा- एक ही मुद्दे पर कई याचिकाएं क्यों? हमने इस विषय को पहले ही उठाया है। अदालत ने सुझाव दिया कि यदि याचिकाकर्ता व्यक्तिगत रूप से प्रभावित हैं तो जनहित याचिका को निजी याचिका (रिट याचिका) में परिवर्तित किया जाए। इस याचिका की सुनवाई गुरुवार, 8 मई को होगी।




