
मुंबई। गैंगस्टर से नेता बने अरुण गवली को बीएमसी चुनाव 2026 में बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। उनकी बेटी गीता गवली भायखला के वार्ड 212 से समाजवादी पार्टी की उम्मीदवार अमरीन शेहज़ान अब्राहानी से चुनाव हार गईं। इससे पहले अरुण गवली की दूसरी बेटी योगिता गवली भी वार्ड 207 से भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार रोहिदास लोखंडे के खिलाफ चुनाव हार चुकी थीं। इस तरह अरुण गवली के लिए यह चुनाव पूरी तरह निराशाजनक रहा, क्योंकि उनकी दोनों बेटियां—गीता और योगिता अपने पिता द्वारा स्थापित राजनीतिक दल अखिल भारतीय सेना का प्रतिनिधित्व करते हुए भी जीत दर्ज नहीं कर सकीं। गीता गवली का मुकाबला कांग्रेस की नाज़िया सिद्दीकी, मनसे की हलदंकर श्रावणी विनय, समाजवादी पार्टी की अमरीन शहज़ान अब्राहानी, संभाजी ब्रिगेड पार्टी की साल्वी अमिता संतोष और निर्दलीय उम्मीदवार मुस्कान मेराज शेख से था। गीता गवली भायखला–अग्रीपाड़ा क्षेत्र (वार्ड 212) से चुनाव मैदान में थीं और वे दूसरा कार्यकाल हासिल करने की कोशिश कर रही थीं। चुनावी हलफनामे में उन्होंने अपनी कुल संपत्ति 7.26 करोड़ रुपये घोषित की थी, जिसमें 4.70 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति शामिल है। वर्ष 2019 के विधानसभा चुनाव के दौरान उनकी संपत्ति 3.38 करोड़ रुपये बताई गई थी। गौरतलब है कि 2017 के बीएमसी चुनाव में गीता गवली ने वार्ड 212 से 9028 वोटों से जीत दर्ज की थी। उस चुनाव में कांग्रेस की नाज़िया सिद्दीकी को 5709 वोट और अविभाजित शिवसेना की सोनल साइगांवकर को 2148 वोट मिले थे। उस समय गीता गवली ने अपने प्रदर्शन को ज़मीनी स्तर पर किए गए काम और जनता से सीधे संपर्क का परिणाम बताया था। बीएमसी चुनाव 2026 के तहत 227 सीटों के लिए 15 जनवरी को मतदान हुआ, जिसमें 52.94 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। चुनाव परिणामों ने स्पष्ट कर दिया कि इस बार मुंबई की राजनीति में मतदाताओं ने कई पुराने समीकरणों को बदल दिया है, जिसमें अरुण गवली परिवार की हार एक अहम राजनीतिक संकेत मानी जा रही है।



