Sunday, April 12, 2026
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भाजपा स्थापना दिवस विशेष: भाजपा विचारधारा और जनसेवा की जीवंत परंपरा


हेमेन्द्र क्षीरसागरपत्रकार, लेखक व स्तंभकार
देश को एक समर्थ राष्ट्र बनाने की मीमांसा के साथ भारतीय जनता पार्टी की स्थापना 6 अप्रैल, 1980 को नई दिल्ली के कोटला मैदान में आयोजित एक कार्यकर्ता अधिवेशन में की हुई। जिसके प्रथम अध्यक्ष अटल बिहारी वाजपेयी निर्वाचित हुए। प्रथम राष्ट्रीय अधिवेशन 28, 29 और 30 दिसंबर 1980 में मुंबई में आयोजित किया गया था। अपनी स्थापना के साथ ही भाजपा ने राष्ट्रीय एवं लोकहित के विषयों पर मुखर रहते हुए भारतीय लोकतंत्र में अपनी सशक्त भागीदारी दर्ज की तथा भारतीय राजनीति को नए आयाम दिए। देश में विकास आधारित राजनीति की नींव भी भाजपा ने विभिन्न राज्यों में सत्ता में आने के बाद तथा पूरे देश में भाजपा नीत राजग शासन के दौरान रखी।नेहरू का अधिनायकवादगांधीजी की हत्या के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर प्रतिबंध लगाकर देश में एक नया राजनीतिक षड्यंत्र रचा जाने लगा। सरदार पटेल के देहावसान के पश्चात् कांग्रेस में नेहरू का अधिनायकवाद प्रबल होने लगा। गांधी और पटेल दोनों के ही नहीं रहने के कारण कांग्रेस नेहरूवाद की चपेट में आ गई तथा अल्पसंख्यक तुष्टिकरण, लाइसेंस- परमिट- कोटा राज, राष्ट्रीय सुरक्षा पर लापरवाही, राष्ट्रीय मसलों जैसे कश्मीर आदि पर घुटनाटेक नीति, अंतर्राष्ट्रीय मामलों में भारतीय हितों की अनदेखी आदि अनेक विषय देश में राष्ट्रवादी नागरिकों को उद्विग्न करने लगे। नेहरूवाद तथा पाकिस्तान एवं बांग्लादेश में हिन्दू अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचार पर भारत के चुप रहने से क्षुब्ध होकर डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने नेहरु मंत्रिमंडल से त्यागपत्र दे दिया।जनसंघ की स्थापनाइधर, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कुछ स्वयंसेवकों ने भी प्रतिबंध के दंश को झेलते हुए महसूस किया कि संघ के राजनीतिक क्षेत्र से सिद्धांततः दूरी बनाये रखने के कारण वे अलग-थलग तो पड़े ही। साथ ही संघ को राजनीतिक तौर पर निशाना बनाया जा रहा था। ऐसी परिस्थिति में एक राष्ट्रवादी राजनीतिक दल की आवश्यकता देश में महसूस की जाने लगी। फलतः भारतीय जनसंघ की स्थापना 21 अक्टूबर, 1951 को डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी की अध्यक्षता में दिल्ली के राघोमल आर्य कन्या उच्च विद्यालय में हुई। नेहरू के अधिनायकवादी रवैये के फलस्वरूप डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी को कश्मीर की जेल में डाल दिया गया, जहां उनकी रहस्यपूर्ण स्थिति में मृत्यु हो गई। एक नई पार्टी को सशक्त बनाने का कार्य पं दीनदयाल उपाध्याय के कंधों पर आ गया। भारत-चीन युद्ध में भी भारतीय जनसंघ ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 1967 में पहली बार भारतीय जनसंघ का पं दीनदयाल उपाध्याय के नेतृत्व में भारतीय राजनीति पर लम्बे समय से बरकरार कांग्रेस का एकाधिकार टूटा। जिससे कई राज्यों के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की पराजय हुई।कार्यकर्ताओं की मीसाबंदीसत्तर के दशक में तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी के नेतृत्व में निरंकुश होती जा रही कांग्रेस सरकार के विरूद्ध देश में जन-असंतोष उभरने लगा। जनान्दोलनों से घबराकर इंदिरा गांधी की कांग्रेस सरकार ने जनता की आवाज को दमनचक्र से कुचलने का प्रयास किया। परिणामत: 25 जून, 1975 को देश पर आपातकाल थोप दिया गया। देश के सभी बड़े नेता या तो नजरबंद कर दिये गए अथवा जेलों में डाल दिए गये। समाचार पत्रों पर सेंसर लगा दिया गया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ सहित अनेक राष्ट्रवादी संगठनों पर प्रतिबंध लगा दिया गया। हजारों कार्यकर्ताओं को मीसा के तहत गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया गया। देश में लोकतंत्र पर खतरा मंडराने लगा। ये जनसंघर्ष को देखते हुए इंदिरा गांधी ने 18 जनवरी, 1977 को लोकसभा भंग कर दी। दौरान जयप्रकाश नारायण के आह्वान पर एक नये राष्ट्रीय दल जनता पार्टी का गठन किया गया। आम चुनावों में कांग्रेस की करारी हार हुई। जनता पार्टी भारी बहुमत के साथ सत्ता में आई। पूर्व घोषणा के अनुसार 1 मई, 1977 को भारतीय जनसंघ ने करीब 5000 प्रतिनिधियों के एक अधिवेशन में अपना विलय जनता पार्टी में कर दिया।प्रतिपादित पंचनिष्ठाभाजपा ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय द्वारा प्रतिपादित ‘एकात्म-मानवदर्शन’ को अपने वैचारिक दर्शन के रूप में अपनाया है। पार्टी ने अपनी पंचनिष्ठा व्यक्त की- राष्ट्रवाद एवं राष्ट्रीय अखंडता, लोकतंत्र, सर्व धर्म समभाव, गांधीवादी समाजवाद तथा मूल्य आधारित राजनीति। स्तुत्य, आज भाजपा देश में एक प्रमुख राष्ट्रवादी शक्ति के रूप में उभर चुकी है। देश के सुशासन, विकास, एकता एवं अखंडता के लिए कृतसंकल्प है। आज नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में पहली बार भाजपा की पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनी। अतुल्य निरंतर तीसरी बार आज सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास की उद्घोषणा के साथ गौरव सम्पन्न भारत का पुनर्निर्माण कर रही है। अतिरेक देश के अधिकांश राज्यों में भाजपा या एनडीए सहयोगी दलों की सरकारें चतुर्दिक विकास में अग्रसर है। अभिभूत, 47 वर्ष के दल में 45 बरस के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के नेतृत्व में ध्येनिष्ठ कार्यकर्ताओं की शक्ति भाजपा लगभग 14 करोड़ सदस्यों वाली विश्व की सबसे बड़ी राजनैतिक पार्टी बन गई।अन्य दलों से विशिष्टभाजपा केवल एक राजनीतिक दल नहीं, बल्कि विचारधारा, सिद्धांत और जनसेवा की एक जीवंत परंपरा है। यह एक ऐसा संगठन है जो सत्ता को साधन नहीं, बल्कि राष्ट्रसेवा का माध्यम मानता है। यहां हर कार्यकर्ता राजनीति में सत्ता की चाह से नहीं, बल्कि जनसेवा के संकल्प के साथ उतरता है। यह वह संगठन है जहां परिवार नहीं, कार्यकर्ता पहचान होता है। जहां सिफारिश नहीं, बल्कि समर्पण आगे बढ़ने का मार्ग बनाता है। यही विशेषता भाजपा को अन्य राजनीतिक दलों से अलग और विशिष्ट बनाती है।

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