
राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने एकता और सांस्कृतिक विरासत पर दिया जोर
मुंबई। महाराष्ट्र लोकभवन में ‘बिहार राज्य स्थापना दिवस’ समारोह का आयोजन राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा की प्रमुख उपस्थिति में किया गया। ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ पहल के अंतर्गत आयोजित इस कार्यक्रम में मुंबई विश्वविद्यालय का विशेष सहयोग रहा। इस अवसर पर राज्यपाल ने कहा कि बिहार संस्कृति, अध्यात्म और दर्शन की समृद्ध भूमि है, जिसने देश को भगवान महावीर और भगवान बुद्ध जैसे महान व्यक्तित्व दिए। उन्होंने कहा कि भारत केवल एक राष्ट्र नहीं, बल्कि लोकतंत्र की जननी है और इसकी जड़ें बिहार की प्राचीन परंपराओं में निहित हैं। राज्यपाल ने अपने संबोधन में यह भी उल्लेख किया कि बिहार के लोग देशभर में विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। प्रशासनिक सेवाओं से लेकर सामाजिक जीवन तक उनकी सक्रिय भूमिका देश की एकता को मजबूत करती है। उन्होंने कहा कि भारत विविधताओं के बावजूद एकता का प्रतीक है और यही इसकी सबसे बड़ी ताकत है। कार्यक्रम के दौरान छात्रों ने बिहार की लोकसंस्कृति को दर्शाते हुए सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं, जिनमें मिथिला क्षेत्र के लोकनृत्य ‘झिझिया’ और ‘जट-जटिन’ के साथ भोजपुरी गीत शामिल थे। राज्यपाल ने इन प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए कहा कि बिहार की कला और संगीत में विशेष ऊर्जा और जीवंतता है। इस अवसर पर बिहार के राज्यपाल लेफ्टनंट जनरल (सेवानिवृत्त) सय्यद अता हसनैन का संदेश वीडियो के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। साथ ही बिहार राज्य की विशेषताओं पर आधारित एक जानकारीपूर्ण फिल्म भी दिखाई गई। कार्यक्रम में कुलगुरु प्रो. रविंद्र कुलकर्णी और प्र-कुलगुरु प्रा. अजय भामरे ने राज्यपाल का स्वागत किया। इस मौके पर लोकभवन और विश्वविद्यालय के अधिकारी, कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।




