
इंद्र यादव/ नासिक। सरकार अपने कर्मचारियों को बेहतरीन सुविधाएं और मोटी सैलरी देती है, लेकिन कुछ अधिकारियों का लालच खत्म होने का नाम नहीं ले रहा। नासिक में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने एक ऐसी ही बड़ी मछली को जाल में फंसाया है। जीएसटी (GST) विभाग के दो बड़े अधिकारियों को 20 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया है।
क्या है पूरा मामला!
यह कार्रवाई नासिक के वस्तु एवं सेवा कर (GST) कार्यालय में हुई। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में राज्य कर उपायुक्त सोमनाथ दत्तू पागे (47) और सहायक राज्य कर आयुक्त मच्छिंद्र विठ्ठल दोंदे (55) शामिल हैं। इनके साथ ही रिश्वत की रकम लेने आए उनके एक निजी साथी अमित हिरामण जाधव को भी दबोच लिया गया है।
1.25 करोड़ की मांग, 1 करोड़ में हुई ‘डील’!
मामला किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। इन अधिकारियों ने शिकायतकर्ता पर जीएसटी विभाग की ओर से कार्रवाई की थी। इस कार्रवाई से बचने या मामले को रफा-दफा करने के बदले में उन्होंने पहले 1 करोड़ 25 लाख रुपये की भारी-भरकम मांग की थी। बाद में मोलभाव (तडजोड) हुआ और सौदा 1 करोड़ रुपये में तय हुआ।
पहली किस्त: 20 लाख रुपये। जैसे ही निजी व्यक्ति (अमित जाधव) शिकायतकर्ता के ऑफिस में 20 लाख रुपये लेने पहुंचा, एसीबी की टीम ने उसे दबोच लिया।
घर की तलाशी में भी मिला कैश!
गिरफ्तारी के बाद जब एसीबी ने आरोपी अधिकारियों के घरों की तलाशी ली, तो वहां से भी 2 लाख रुपये नकद बरामद हुए हैं। फिलहाल तीनों आरोपियों के खिलाफ ‘भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988’ की धारा 7 और 12 के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। यह कार्रवाई उन भ्रष्ट अधिकारियों के लिए एक कड़ा संदेश है जो सरकारी कुर्सी का इस्तेमाल अपनी तिजोरियां भरने के लिए करते हैं।




