
नई दिल्ली। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की एक चौंकाने वाली जांच में खुलासा हुआ है कि आतंकवादी संगठन ISIS से जुड़े तत्व तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक सहित दक्षिण भारत के राज्यों में स्थित धार्मिक स्थलों और मंदिरों को निशाना बनाने की साजिश रच रहे हैं।
जांच के मुताबिक, आतंकी संगठन के सदस्य तमिलनाडु को इस्लामिक स्टेट बनाने के लक्ष्य के साथ सलाफी-जिहादी विचारधारा का प्रचार कर रहे हैं। यह जानकारी ईटीवी भारत को एक अधिकारी ने दी, जिन्होंने बताया कि सभी संबंधित राज्य सरकारों को सतर्क कर दिया गया है। यह खुलासा 2022 के कोयंबटूर कार बम विस्फोट की जांच के दौरान हुआ, जिसमें एक हिंदू मंदिर को निशाना बनाया गया था। एनआईए ने हाल ही में इस मामले में एक सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की है, जिसमें शेख हिदायतुल्लाह, उमर फारुक, पावस रहमान, शरण मरियप्पन और अबू हनीफा पर आतंकी वित्तपोषण और हमले में संलिप्तता का आरोप लगाया गया है। अब तक इस मामले में कुल 17 आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल हो चुका है। जांच में यह भी पता चला कि इन आरोपियों ने 2021-22 में एक फर्जी कोविड वैक्सीन प्रमाणपत्र घोटाला किया था और उससे मिले पैसों का उपयोग विस्फोटक सामग्री और अन्य आतंकी संसाधनों की खरीद के लिए किया गया।
सलाफी-जिहादी विचारधारा क्या है?
सलाफी जिहादवाद एक सुन्नी इस्लामवादी विचारधारा है, जो सशस्त्र संघर्ष के माध्यम से वैश्विक इस्लामिक खिलाफत की स्थापना का लक्ष्य रखती है। यह विचारधारा राजनीतिक विरोधियों को दुश्मन मानती है और हिंसा के जरिए अपने उद्देश्य को प्राप्त करने की कोशिश करती है। गृह मंत्रालय की आतंकवाद और कट्टरपंथ विरोधी इकाई लगातार एनआईए और अन्य एजेंसियों के साथ समन्वय में है। मंत्रालय के अनुसार, यह विचारधारा देशभर में युवाओं को गुमराह कर उन्हें राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों में धकेलने की कोशिश कर रही है। एजेंसियां देश के हर कोने में संभावित खतरों की निगरानी कर रही हैं और समय-समय पर कार्रवाई की जा रही है।




