
मुंबई (इंद्र यादव)। मुंबई से सटे विरार इलाके में वन विभाग ने एक फिल्मी अंदाज में बड़ी कार्रवाई करते हुए तेंदुए की खाल की तस्करी करने वाले दो आरोपियों को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। यह पूरी कार्रवाई एक गुप्त सूचना के आधार पर की गई, जिसमें भाताणे वन परिक्षेत्र के अधिकारियों को खबर मिली थी कि कुछ तस्कर तेंदुए की असली खाल बेचने के लिए ग्राहक तलाश रहे हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए अधिकारियों ने खुद को अमीर खरीदार बताकर तस्करों से संपर्क किया और काफी मोलभाव के बाद सौदा तय किया गया। मिलने के लिए मुंबई-अहमदाबाद हाईवे पर स्थित खानिवडे टोल प्लाजा को चुना गया, जहां रविवार देर रात तस्कर खाल लेकर पहुंचे, लेकिन उन्हें जरा भी अंदाजा नहीं था कि जिन ग्राहकों से वे सौदा कर रहे हैं, वे असल में वन विभाग के अधिकारी हैं। जैसे ही तस्करों ने खाल दिखाई, पहले से घेराबंदी कर तैयार टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए दोनों को गिरफ्तार कर लिया और उनके पास से तेंदुए की पूरी खाल बरामद की, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत लाखों रुपये आंकी जा रही है। इस कार्रवाई के बाद आरोपियों को अदालत में पेश किया गया, जहां कोर्ट ने उन्हें 1 अप्रैल तक वन विभाग की हिरासत में भेज दिया है। अब अधिकारियों द्वारा उनसे कड़ी पूछताछ की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि तेंदुए का शिकार कहां हुआ, क्या इस तस्करी के पीछे कोई बड़ा गिरोह सक्रिय है और क्या आरोपियों ने पहले भी ऐसे अपराध किए हैं। गौरतलब है कि भारत में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत तेंदुआ ‘अनुसूची-1’ में शामिल है, जिसे सर्वोच्च सुरक्षा प्राप्त है, और इसका शिकार करना या इसके अंगों की तस्करी करना एक गैर-जमानती अपराध है, जिसमें 7 साल तक की सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान है। वन अधिकारियों के अनुसार तेंदुए जंगल के पारिस्थितिकी संतुलन को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं, इसलिए इस तरह की तस्करी न सिर्फ कानूनन अपराध है बल्कि पर्यावरण के लिए भी गंभीर खतरा है। फिलहाल खानिवडे टोल के पास हुई इस कार्रवाई से तस्करों में खौफ का माहौल है और वन विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि यदि उन्हें वन्यजीव तस्करी से जुड़ी कोई भी जानकारी मिले तो तुरंत विभाग को सूचित करें।




