
बीड। बीड के मासजोग सरपंच संतोष देशमुख की हत्या के मामले में सुनवाई शुरू हो गई है और फिलहाल कोर्ट में दूसरा सत्र चल रहा है। विशेष सरकारी वकील उज्ज्वल निकम ने घटनाओं के क्रम और आरोपियों की भूमिका का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया। सुनवाई के दौरान यह सामने आया कि मुख्य आरोपी सुदर्शन घुले ने जयराम चाटे और महेश केदार के साथ पुलिस के सामने हत्या की बात कबूल की है। उज्ज्वल निकम ने बताया कि आरोप तय करने के लिए मामला तैयार है, लेकिन बचाव पक्ष के वकीलों ने आवश्यक दस्तावेजों की कमी का हवाला देते हुए इस पर आपत्ति जताई। अगली सुनवाई 10 अप्रैल को होगी। घुले के बयान के अनुसार, संतोष देशमुख एक पवनचक्की कंपनी से पैसे ऐंठने में बाधा थे, इसलिए उन्होंने और उनके साथियों ने प्रतीक घुले के जन्मदिन समारोह के बाद देशमुख के खिलाफ साजिश रची। इस हत्या से पहले वे होटल तिरंगा में विष्णु चाटे से भी मिले थे। इस बीच, मराठा आरक्षण आंदोलन का नेतृत्व कर रहे मनोज जरांगे पाटिल ने विधायक धनंजय मुंडे पर गंभीर आरोप लगाते हुए उन्हें इस हत्याकांड का मास्टरमाइंड बताया। उन्होंने कहा कि यह हत्या जबरन वसूली के मकसद से की गई और इसमें संगठित अपराध के तत्व हैं। पाटिल ने मुंडे को चेतावनी देते हुए कहा, सच्चाई छिपाई नहीं जा सकती, चाहे कोई कितनी भी कोशिश कर ले। अगर आप मेरे रास्ते पर चलते रहे, तो मैं पीछे नहीं हटूंगा। इसके अलावा, पाटिल ने आरोप लगाया कि सरकार धनंजय मुंडे को बचाने की कोशिश कर रही है और उपमुख्यमंत्री अजीत पवार व गृह मंत्री देवेंद्र फडणवीस की भी आलोचना की। उन्होंने मांग की कि चूंकि इस साजिश से जुड़ी एक बैठक मुंडे के कार्यालय में हुई थी, इसलिए उन पर आईपीसी की धारा 302 (हत्या) के तहत मामला दर्ज किया जाए। उन्होंने गृह मंत्री से इस मामले में तत्काल कार्रवाई करने का आग्रह किया।




