
मुंबई। महाराष्ट्र में बढ़ती ट्रैफिक समस्या और शहरी प्रदूषण को नियंत्रित करने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने नए ऑटो रिक्शा को परमिट जारी करने पर अस्थायी रोक लगा दी है। यह जानकारी राज्य के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने दी। मंत्री सरनाईक ने बताया कि 9 मार्च से नए ऑटो रिक्शा को परमिट देने की प्रक्रिया फिलहाल स्थगित कर दी गई है। राज्य मंत्रिमंडल की आगामी बैठक में यह तय किया जाएगा कि नए ऑटो रिक्शा परमिट किन-किन मानकों के आधार पर दिए जाएं। उसी के अनुसार आगे का निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में 5 लाख से अधिक जनसंख्या वाले शहरों में ऑटो रिक्शा परमिट से संबंधित निर्णय लेने का अधिकार राज्य सरकार के पास है। केंद्र सरकार के सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने भी राज्य सरकारों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार इस विषय में निर्णय लेने की अनुमति दी है। परिवहन मंत्री के अनुसार, केंद्र सरकार से किए गए पत्राचार के बाद कार्यालयीन स्मरणपत्र के माध्यम से यह स्पष्ट किया गया कि मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम, 2019 के तहत राज्यों को परिवहन व्यवस्था को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक लचीलापन दिया गया है। साथ ही मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 67 (3) के अनुसार राज्य सरकार को यात्री और माल परिवहन से जुड़े परमिट में बदलाव करने तथा विभिन्न योजनाएं लागू करने का अधिकार प्राप्त है। इन अधिकारों का उपयोग कर राज्य सरकार लास्ट माइल कनेक्टिविटी सुधारने और ट्रैफिक जाम कम करने के लिए आवश्यक कदम उठा सकती है। सरनाईक ने बताया कि वर्तमान में राज्य में लगभग 14 लाख ऑटो रिक्शा परमिट जारी किए जा चुके हैं। कई स्थानों पर एक ही परिवार के नाम पर कई परमिट होने और कुछ मामलों में बांग्लादेशी नागरिकों को अवैध रूप से परमिट दिए जाने की शिकायतें भी सामने आई हैं। केंद्र सरकार ने राज्य सरकार को सलाह दी है कि बड़े शहरों में ऑटो रिक्शा परमिट से जुड़े मुद्दों को स्थानीय यातायात की जरूरत और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए उचित तरीके से संभाला जाए।परिवहन मंत्री ने कहा कि नागरिकों को बेहतर और सुगम परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार जल्द ही इस विषय पर आवश्यक नीतिगत निर्णय लेगी।




