
आरोपी की याचिका खारिज होने के बाद प्रशासनिक आदेश से केस ट्रांसफर, समय और मंशा पर उठे सवाल
ठाणे। मल्टी-करोड़ बलगांगा बांध सिंचाई घोटाले से जुड़े हाई-प्रोफाइल आपराधिक मामले को एक जज से दूसरे जज को ट्रांसफर किए जाने से कानूनी और राजनीतिक हलकों में नई बहस शुरू हो गई है। खास बात यह है कि यह ट्रांसफर ऐसे समय पर हुआ है, जब वर्षों की देरी के बाद मामला हाल ही में ट्रायल के चरण में आगे बढ़ना शुरू हुआ था। इस सिंचाई घोटाले की जांच एंटी-करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने की थी। एसीबी ने वर्ष 2016 में ठेकेदार निसार खत्री और कोंकण सिंचाई विकास निगम (केआईडीसी) से जुड़े कई सरकारी अधिकारियों के खिलाफ करीब 30 हजार पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी। जांच एजेंसी के अनुसार, कथित अनियमितताओं के कारण राज्य के खजाने को 92 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ। गंभीर आरोपों के बावजूद, मामला कई वर्षों तक ठाणे की विशेष अदालत में लगभग ठप रहा। आरोप तय नहीं हो पाए और ट्रायल शुरू नहीं हो सका। वर्ष 2025 में विशेष जज जी.टी.पवार ने सभी आरोपियों के खिलाफ आरोप तय कर औपचारिक रूप से ट्रायल शुरू किया, जिससे यह उम्मीद जगी कि लंबे समय से लंबित मामला अब आगे बढ़ेगा। इसी बीच दिसंबर 2025 में मुख्य आरोपी निसार खत्री ने ठाणे के प्रधान जिला जज के समक्ष आवेदन देकर जज पवार से मामला ट्रांसफर करने की मांग की। इस आवेदन को प्रधान जिला जज एस. बी. अग्रवाल ने सख्ती से खारिज करते हुए न केवल याचिका को आधारहीन बताया, बल्कि खत्री पर 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। इसके बावजूद, अब एक प्रशासनिक आदेश के जरिए इस मामले को जज जी. टी. पवार से जज दुर्गाप्रसाद देशपांडे को सौंप दिया गया है। जज बदलने का यह फैसला ठीक उसी अवधि में आया है, जब आरोपी की ट्रांसफर याचिका खारिज की गई थी। इसी कारण इस कदम के समय और परिस्थितियों पर सवाल उठाए जा रहे हैं। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि प्रशासनिक ट्रांसफर न्यायिक व्यवस्था का सामान्य हिस्सा होते हैं, लेकिन किसी आरोपी की याचिका खारिज होने और जुर्माना लगाए जाने के तुरंत बाद ऐसा ट्रांसफर होना संदेह और अटकलों को जन्म देता है। विवाद की पृष्ठभूमि को और जटिल बनाता है बॉम्बे हाई कोर्ट का अक्टूबर 2025 का वह आदेश, जिसमें राज्य सरकार को बलगांगा बांध परियोजना के संबंध में निसार खत्री को 303 करोड़ रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया गया था। राज्य सरकार ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती नहीं दी, जिसे लेकर भी सवाल उठे थे। बलगांगा सिंचाई घोटाले के राजनीतिक निहितार्थ भी अहम रहे हैं। आरोप सामने आने के समय इस मामले ने तत्कालीन कांग्रेस-एनसीपी सरकार की छवि को भारी नुकसान पहुंचाया था। उस समय विपक्ष के नेता रहे देवेंद्र फडणवीस, जो अब मुख्यमंत्री हैं, इस घोटाले को बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का उदाहरण बताकर लगातार उठाते रहे थे। फिलहाल ठाणे की विशेष अदालत में आपराधिक ट्रायल लंबित है।




