
मुंबई। मुंबई में बॉम्बे हाईकोर्ट ने बदलापुर यौन उत्पीड़न मामले के आरोपी अक्षय शिंदे की हिरासत में संदिग्ध मौत को गंभीरता से लेते हुए सोमवार को ठाणे अपराध शाखा के पांच पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और विशेष जांच दल (एसआईटी) के गठन का आदेश दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह निर्विवाद है कि आरोपी की मौत गोली लगने से हुई और इसपर राज्य की निष्क्रियता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने संयुक्त पुलिस आयुक्त (अपराध) लखमी गौतम के नेतृत्व में एसआईटी गठित करने का निर्देश देते हुए कहा कि जांच निष्पक्ष होनी चाहिए और बिना किसी दबाव के तथ्यों को सामने लाना चाहिए। जिन अधिकारियों पर एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं, उनमें वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक संजय शिंदे, एपीआई नीलेश मोरे, हेड कांस्टेबल अभिजीत मोरे और हरीश तावड़े, तथा कांस्टेबल सतीश खताल शामिल हैं। शिंदे को तलोजा जेल से कल्याण ले जाते समय कथित रूप से गोली मारी गई थी, लेकिन मजिस्ट्रेट की रिपोर्ट में इस मुठभेड़ पर गंभीर संदेह जताया गया है और इसे अनुचित बल प्रयोग माना गया है। मृतक के माता-पिता द्वारा याचिका वापस लेने की मांग पर भी कोर्ट ने सख्ती दिखाते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता मंजुला राव को अदालत मित्र नियुक्त कर जांच जारी रखने का फैसला किया। अदालत ने सीआईडी को सभी दस्तावेज दो दिन में एसआईटी को सौंपने और एसआईटी अधिकारियों को तत्काल मौजूदा कर्तव्यों से मुक्त करने का निर्देश भी दिया है।
क्या है मामला
महाराष्ट्र के बदलापुर में 12 अगस्त 2024 को एक स्कूल में बच्ची के साथ यौन शोषण की घटना हुई थी। जिसमें पुलिस ने आरोपी अक्षय शिंदे को गिरफ्तार किया था। 23 सितंबर 2024 को पुलिस एनकाउंटर में अक्षय की मौत हो गई। पुलिस ने दावा किया कि अक्षय ने पुलिस हिरासत से भागने की कोशिश की और इस दौरान पुलिसकर्मियों पर हमला किया। पुलिस का कहना है कि आत्मरक्षा में चलाई गई गोली से अक्षय की मौत हो गई।




