
अमरावती। प्रहार जनशक्ति पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व विधायक बच्चू कडू ने महाराष्ट्र सरकार से किसानों की संपूर्ण कर्जमाफी और दिव्यांग नागरिकों के लिए बेहतर सहायता की मांग को लेकर 8 जून से अमरावती जिले के तिओसा तालुका स्थित गुरुकुंज मोझरी गांव में शुरू किया गया अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल बुधवार को भी जारी रखा। कडू ने साफ कहा है कि जब तक सरकार उनकी मांगों को स्वीकार नहीं करती, तब तक वे पीछे नहीं हटेंगे। इस आंदोलन को राकेश टिकैत, मराठा कोटा कार्यकर्ता मनोज जरांगे और अन्य किसान नेताओं का समर्थन प्राप्त है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले कडू से बातचीत करेंगे, लेकिन कडू ने सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए किसी भी आधे-अधूरे आश्वासन को ठुकरा दिया है। उन्होंने कहा कि आंदोलन विधानसभा चुनाव में हार की प्रतिक्रिया नहीं है, बल्कि किसानों, दिव्यांगों और उपेक्षित वर्गों के लिए आवाज उठाने का माध्यम है। चार दिनों के अनशन से कडू का वजन दो किलोग्राम कम हो गया है और उनकी स्वास्थ्य स्थिति कमजोर होती जा रही है। उनकी प्रमुख मांगों में किसानों की संपूर्ण कर्जमाफी, दिव्यांगों को ₹6,000 मासिक सहायता, शेतमजूरों के लिए स्वतंत्र आर्थिक महामंडल, विधवा महिलाओं को मासिक सहायता और किसानों के बच्चों के लिए छात्रवृत्ति शामिल हैं। बुधवार को राकेश टिकैत और मनोज जरांगे ने गुरुकुंज पहुंचकर कडू से मुलाकात की और समर्थन जताया। जरांगे ने राज्यव्यापी बंद की अपील की, जबकि राष्ट्रवादी कांग्रेस के विधायक रोहित पवार ने सरकार से मांगों को गंभीरता से लेने को कहा। वहीं, मुंबई में प्रहार जनशक्ति पार्टी के कार्यकर्ताओं ने मंत्रालय के बाहर प्रदर्शन किया।
इस बीच अमरावती में मंगलवार को आंदोलन हिंसक हो गया जब कडू समर्थकों ने जिला कलेक्टर कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन के दौरान पथराव कर दिया, जिससे क्षेत्र में तनाव फैल गया। कडू ने हिंसा की निंदा की, पर कहा कि सरकार की उदासीनता ही लोगों के गुस्से की वजह है। उन्होंने कहा कि अमरावती और विदर्भ क्षेत्र में किसान कर्ज, फसल नुकसान और एमएसपी की कमी के कारण आत्महत्या करने को मजबूर हैं। वर्ष 2017 में अमरावती डिविजन में सबसे अधिक 907 किसान आत्महत्याएं दर्ज की गई थीं। बच्चू कडू पहले भी किसानों और उपेक्षित तबकों के लिए सड़क से लेकर सदन तक संघर्ष करते रहे हैं। 2019 में उन्होंने राजभवन तक मार्च निकाला था और जनवरी 2025 में दिव्यांग कल्याण विभाग के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देकर जनआंदोलन का रास्ता चुना था। उनका कहना है कि यह लड़ाई व्यक्तिगत नहीं, बल्कि उन लाखों लोगों के हक की है जो सरकार की नीति और व्यवस्था में अनसुने रह जाते हैं।




