
मुंबई। मुलुंड टोल प्लाजा पर लगे होर्डिंग को लेकर महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम (एमएसआरडीसी) और मुंबई महानगरपालिका के बीच अनुमति को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। उद्योग मंत्री उदय सामंत ने विधानसभा में स्पष्ट किया कि एमएसआरडीसी ने एजेंसी को नगर निगम से अनुमति लेने की शर्त पर होर्डिंग लगाने की इजाजत दी थी, लेकिन संबंधित एजेंसी ने बिना अनुमति के यह होर्डिंग लगा दिया, जिसके चलते नगर निगम ने कार्रवाई की। विधानसभा में यह प्रश्न सदस्य अमित साटम ने उठाया, जबकि सदस्य योगेश सागर और पराग अलवाणी ने उप-प्रश्न पूछे। मंत्री सामंत ने जानकारी दी कि मुलुंड टोल प्लाजा पर लगे होर्डिंग एमएसआरडीसी द्वारा निविदा प्रक्रिया के माध्यम से लगाए गए हैं। हालांकि, जब नगर निगम ने इन होर्डिंग्स का निरीक्षण किया तो पता चला कि इसके लिए मुंबई महानगरपालिका से मंजूरी नहीं ली गई थी। इसके चलते इन होर्डिंग्स पर प्रदर्शित विज्ञापनों को तत्काल हटा दिया गया है। मंत्री सामंत ने आगे बताया कि मुंबई में सभी होर्डिंग्स का व्यापक ऑडिट तीन महीने के भीतर पूरा कर लिया जाएगा और इसकी रिपोर्ट अगले विधानसभा सत्र में पेश की जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि मुलुंड टोल प्लाजा या मुंबई में अन्य किसी स्थान पर यदि बिना अनुमति के विज्ञापन प्रदर्शित किया गया, तो संबंधित ठेकेदार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह मामला मुंबई में अवैध होर्डिंग्स और विज्ञापनों के मुद्दे की गंभीरता को उजागर करता है। सरकार ने इस मामले पर सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि बिना उचित अनुमति के लगाए गए होर्डिंग्स को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।




