
पालघर। वसई के मुलगांव इलाके में 21 जुलाई को दो नाबालिग स्कूली छात्राओं के अपहरण की एक सनसनीखेज कोशिश स्थानीय लोगों की सतर्कता के चलते नाकाम हो गई। खोचिवड़े गांव की छात्राएं जब रोज़ की तरह स्कूल से लौट रही थीं, तभी खारेकुरान क्षेत्र में एक ऑटोरिक्शा में सवार चार संदिग्धों ने उन्हें जबरन रिक्शा में खींचने की कोशिश की। छात्राओं के चीखने-चिल्लाने पर आसपास के लोग तत्काल मौके पर पहुंचे और आरोपियों को पकड़ लिया, जिनमें तीन पुरुष ट्रांसजेंडर के वेश में थे, जबकि चौथा ऑटोरिक्शा चालक था। गुस्साई भीड़ ने चारों की मौके पर जमकर पिटाई कर दी। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस तुरंत घटनास्थल पर पहुँची और भीड़ को नियंत्रित कर चारों आरोपियों को अपनी हिरासत में लिया। उन्हें प्राथमिक उपचार के लिए सर डी.एम. पेटिट म्युनिसिपल अस्पताल भेजा गया और बाद में वसई पुलिस स्टेशन लाया गया। पुलिस द्वारा पकड़े गए आरोपियों की पहचान शरद शिंदे, संजय गोलंकर, नीलेश मंडावकर और रिक्शा चालक सूरज मटोल के रूप में हुई है, जो सभी ठाणे के कलवा इलाके के निवासी हैं। प्रारंभिक पूछताछ में खुलासा हुआ कि आरोपी ट्रांसजेंडर का रूप धारण कर भीख मांगने के बहाने इलाके में घूम रहे थे। स्थानीय लोगों ने बताया कि यह रिक्शा और कुछ संदिग्ध चेहरे पिछले कुछ दिनों से इलाके में सक्रिय दिख रहे थे, जिससे यह संदेह प्रबल होता है कि यह एक पूर्व नियोजित अपराध की साजिश थी। पुलिस अब इस प्रकरण में सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है और घटनास्थल के आसपास से अतिरिक्त सबूत जुटा रही है। वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक बालकृष्ण घाडीगांवकर ने पुष्टि की है कि दोनों नाबालिग पीड़िताओं के बयान दर्ज किए जा रहे हैं और आरोपियों से गहन पूछताछ की जा रही है। यह घटना न सिर्फ क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाती है, बल्कि मासूम छात्राओं को लक्षित करने वाली सुनियोजित आपराधिक प्रवृत्ति की ओर भी इशारा करती है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने जांच को प्राथमिकता दी है और सभी आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया है।




