
जयपुर। केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास अठावले ने बुधवार को जयपुर में मीडिया को संबोधित करते हुए महाराष्ट्र में मराठी-हिंदी भाषा विवाद को लेकर शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने हाल ही में मीरा-भायंदर और अन्य क्षेत्रों में हिंदी भाषी नागरिकों के साथ हुई मारपीट की घटनाओं की तीव्र निंदा करते हुए कहा कि “ठाकरे गुट द्वारा हिंदी भाषी लोगों पर हो रहे अत्याचार बेहद दुर्भाग्यपूर्ण हैं। अठावले ने चेतावनी भरे लहजे में कहा, अगर जरूरत पड़ी, तो रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया के कार्यकर्ता ऐसे तत्वों को मुंहतोड़ जवाब देंगे। हमारी पार्टी हिंदी भाषी समुदाय के साथ मजबूती से खड़ी है और उनके हक की लड़ाई पूरी ताकत से लड़ेगी। गौरतलब है कि हाल ही में ठाणे के मीरा-भायंदर इलाके में जोधपुर स्वीट्स के गुजराती दुकानदार से मनसे कार्यकर्ताओं ने कथित तौर पर मराठी में बात न करने को लेकर मारपीट की थी। इसके अलावा, राज्य के अन्य हिस्सों से भी भाषा के आधार पर हिंसा की घटनाएं सामने आई हैं।
बेरोजगारी और सामाजिक न्याय के मुद्दे पर भी मुखर
रामदास अठावले ने इस दौरान बेरोजगारी जैसे अहम मुद्दे पर भी चिंता व्यक्त की और कहा, “रिपब्लिकन पार्टी जनता के अधिकारों और हकों की लड़ाई लड़ रही है। हम बेरोजगारी जैसे विषयों को केंद्र सरकार के सामने मजबूती से उठाएंगे और ठोस कार्रवाई की मांग करेंगे।” उन्होंने सामाजिक न्याय के क्षेत्र में पार्टी की निरंतर प्रतिबद्धता भी दोहराई।
राजस्थान में पार्टी विस्तार को लेकर जताया भरोसा
अठावले ने कहा कि राजस्थान में रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (ए) का जनाधार तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष राधामोहन सैनी के नेतृत्व में संगठन की सक्रियता की तारीफ की और कहा कि “हमारे कार्यकर्ता प्रदेश के कोने-कोने में जाकर पार्टी की विचारधारा और कार्यक्रमों को जनता तक पहुंचा रहे हैं।”
ठाकरे बंधुओं के ‘विजय दिवस’ पर भी कसा तंज
रामदास अठावले ने ठाकरे परिवार पर भी निशाना साधते हुए कहा कि मराठी भाषा की आड़ में हिंसा का माहौल बनाना दुर्भाग्यपूर्ण है। बता दें कि 5 जुलाई को ठाकरे बंधु एक मंच पर ‘विजय दिवस’ के आयोजन में एक साथ नजर आए थे और ‘मराठी अस्मिता’ को लेकर आक्रामक रुख अपनाया था। उद्धव ठाकरे ने मंच से कहा था कि हिंदी एक अच्छी भाषा है, लेकिन उसे थोपा नहीं जा सकता। इस बयान के बाद महाराष्ट्र में भाषा को लेकर बहस और तेज हो गई है। रामदास अठावले के बयान से यह साफ हो गया है कि महाराष्ट्र में भाषा और क्षेत्रीय अस्मिता की राजनीति को लेकर सियासी तापमान और चढ़ सकता है।




