
इंद्र यादव
पालघर। महाराष्ट्र पुलिस की छवि को एक बार फिर उस समय गहरा झटका लगा, जब पालघर जिले के घोलवड पुलिस थाने में तैनात सहायक पुलिस निरीक्षक (एपीआई) साहेबराव शिवाजी कचरे के खिलाफ रिश्वत मांगने के गंभीर आरोप सामने आए। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने आरोपी अधिकारी के विरुद्ध मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। आरोप है कि एपीआई कचरे ने चरस से जुड़े एक एनडीपीएस मामले में आरोपी का नाम हटाने और गिरफ्तारी से बचाने के बदले 50 हजार रुपये की घूस मांगी थी। प्राप्त जानकारी के अनुसार, घोलवड पुलिस थाने में चरस से संबंधित एक एनडीपीएस मामला दर्ज था। इस मामले की जांच के दौरान एपीआई साहेबराव कचरे ने शिकायतकर्ता को भरोसा दिलाया कि वह उसके जीजा का नाम केस से बाहर कर देगा और उसे गिरफ्तार नहीं किया जाएगा। इसके बदले में आरोपी अधिकारी ने 50 हजार रुपये की अवैध मांग रखी। शिकायतकर्ता ने रिश्वत देने के बजाय पूरे मामले की शिकायत ठाणे स्थित एसीबी कार्यालय में दर्ज कराई। शिकायत मिलते ही एसीबी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू की। 10 और 11 दिसंबर को एसीबी की टीम ने योजनाबद्ध तरीके से जाल बिछाकर आरोपी अधिकारी की रिश्वत मांग की गुप्त रूप से पुष्टि की। जांच के दौरान यह स्पष्ट हो गया कि एपीआई कचरे ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए कानूनी प्रक्रिया को दरकिनार कर निजी लाभ के लिए घूस की मांग की थी। मांग की पुष्टि होने के बाद एसीबी ने घोलवड पुलिस थाने में ही अपराध क्रमांक 180/2025 के तहत एपीआई साहेबराव शिवाजी कचरे के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई। उनके विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7 (लोक सेवक द्वारा अवैध परितोषिक की मांग) के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया है। इस मामले की आगे की जांच की जिम्मेदारी पुलिस निरीक्षक रुपाली पोळ को सौंपी गई है। एसीबी अब इस पहलू की भी गहन जांच कर रही है कि क्या इस रिश्वतखोरी में थाने के अन्य पुलिसकर्मी या किसी प्रकार के बिचौलिये भी शामिल थे। पालघर और ठाणे क्षेत्र में एसीबी की इस कार्रवाई से भ्रष्ट अधिकारियों में हड़कंप मच गया है। एसीबी ने आम नागरिकों से अपील की है कि यदि कोई सरकारी कर्मचारी किसी भी काम के बदले रिश्वत की मांग करता है, तो इसकी तत्काल सूचना टोल-फ्री नंबर 1064 पर दें, ताकि भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सके।




