Wednesday, February 4, 2026
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पालघर में 8 साल बाद बंधुआ मज़दूरी से कटकारी आदिवासी युवक मुक्त, ईंट भट्ठा मालिक पर गंभीर धाराओं में केस दर्ज

पालघर। बंधुआ मज़दूरी के खिलाफ एक अहम और साहसिक कार्रवाई में भूमिपुत्र एल्गार संगठन के कार्यकर्ताओं ने एक कटकारी आदिवासी युवक को मुक्त कराया है, जिसे कथित तौर पर पिछले आठ वर्षों से भिवंडी तालुका में एक ईंट भट्ठे पर अमानवीय परिस्थितियों में जबरन काम कराया जा रहा था। मुक्त कराए गए मज़दूर की पहचान दिनेश सुरेश भोईर (26) के रूप में हुई है, जो कटकारी अनुसूचित जनजाति से ताल्लुक रखते हैं। आरोप है कि दिनेश को कल्पेश सूर्यकांत पाटिल के स्वामित्व वाले ईंट भट्ठे पर 75,000 रुपए की एडवांस राशि देने के बाद बंधुआ मज़दूरी में जकड़ लिया गया। जो रकम शुरुआत में एडवांस के तौर पर दी गई थी, वह समय के साथ आर्थिक शोषण, मानसिक उत्पीड़न और शारीरिक हिंसा का जरिया बन गई। शिकायत के अनुसार, दिनेश भोईर के साथ बार-बार मारपीट की गई और उसे लगातार धमकाया जाता रहा। इतना ही नहीं, ईंट भट्ठे के मालिक द्वारा उसकी पत्नी को फोन कर डराने-धमकाने के आरोप भी सामने आए हैं। इस लगातार उत्पीड़न के चलते दिनेश मानसिक रूप से बुरी तरह टूट गया था और कथित तौर पर आत्महत्या की कगार तक पहुंच गया था। मामले की जानकारी मिलते ही भूमिपुत्र एल्गार संगठन के महासचिव नवनाथ भोये और कटकारी युवा कार्यकर्ता मृणाली पवार ने तुरंत हस्तक्षेप किया और गणेशपुरी पुलिस से संपर्क किया। संगठन की ओर से मौके पर पहुंचकर स्थिति का सत्यापन किया गया और कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की गई। पीड़ित द्वारा उपलब्ध कराए गए सबूतों, जिनमें कॉल रिकॉर्डिंग भी शामिल थीं, की जांच के बाद पुलिस ने 15 जनवरी की देर रात ईंट भट्ठा मालिक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया। भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 की धारा 115(2), 352, 351(2), अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की धारा 3(2)(वअ), 3(1)(र), 3(1)(स), और बंधुआ श्रम प्रणाली (उन्मूलन) अधिनियम, 1976 की धारा 16, 17 और 18 के तहत मामला दर्ज किया है। भूमिपुत्र एल्गार संगठन के अध्यक्ष प्रमोद पवार और कार्यकारी अध्यक्ष सुनील लोन ने कहा कि यह उनके संगठन द्वारा मुक्त कराया गया पहला बंधुआ मज़दूर है, लेकिन यह अभियान यहीं नहीं रुकेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि संगठन पीड़ित के पुनर्वास और पूर्ण कानूनी न्याय के लिए सरकार के साथ मिलकर इस मामले को आगे तक ले जाएगा। उन्होंने यह भी साफ किया कि यह केस केवल एडवांस रकम को लेकर नहीं, बल्कि सिद्ध शोषण, हिंसा और जबरन बंधुआ मज़दूरी के आधार पर दर्ज किया गया है। संगठन ने यह भी कहा कि वे ईमानदार ईंट भट्ठा मालिकों के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन जहां भी मज़दूरों के साथ हिंसा और शोषण होगा, वहां कानूनन सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। फिलहाल मामले की आगे की जांच गणेशपुरी सब-डिविजनल पुलिस अधिकारी द्वारा की जा रही है।

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