
अमृतसर। पंजाब के अमृतसर ज़िले में जहरीली शराब के सेवन से हुई त्रासदी में मृतकों की संख्या बढ़कर 21 हो गई है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने घटना को “मौत नहीं, हत्या” करार दिया है और कहा है कि इस आपराधिक कड़ी के तार दिल्ली तक जुड़े हैं। उन्होंने प्रत्येक मृतक के परिवार को ₹10 लाख का मुआवजा देने की घोषणा की है और मामले में अब तक 10 आरोपियों की गिरफ्तारी की पुष्टि की है। सीएम मान ने घटनास्थल का दौरा करते हुए कहा, “यह केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि हत्या है। हम इस मामले की जड़ तक जाएंगे। सप्लाई चेन का खुलासा होते ही जिन-जिन लोगों ने इसमें साथ दिया, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। हमारी टीम दिल्ली भी गई है, कोई नहीं बचेगा।
गरीब परिवारों पर टूटा कहर
मुख्यमंत्री ने बताया कि मृतक अधिकतर अत्यंत गरीब परिवारों से थे और अपने घर के अकेले कमाने वाले सदस्य थे। उन्होंने कहा, “पैसे से जान वापस नहीं आ सकती, लेकिन हम उनके परिवारों को सहारा देने की कोशिश करेंगे। यदि उनके रक्त संबंधों में कोई व्यक्ति काम करने के योग्य है, तो उसे मदद दी जाएगी।
विपक्ष और राज्यपाल का हमला
घटना को लेकर राजनीतिक माहौल भी गरमा गया है। विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने सीएम भगवंत मान को सीधे तौर पर ज़िम्मेदार ठहराते हुए कहा, “भगवंत मान ही मुख्यमंत्री और गृह मंत्री दोनों हैं। जिम्मेदारी उन्हीं की है। वहीं, केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने आरोप लगाया कि “पंजाब में शराब की फैक्ट्रियां सरकार की मिलीभगत के बिना नहीं चल सकतीं। राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने भी घटना को “शर्मनाक और बेहद दुखद” बताया और कहा कि इथेनॉल का ज़हरीला मिश्रण लोगों की मौत का कारण बना। उन्होंने बताया कि उन्होंने स्थानीय SSP से बात की है और आगे की कार्रवाई जारी है। यह त्रासदी न केवल कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही है, बल्कि गरीब तबके के प्रति सरकारी सतर्कता और जवाबदेही पर भी गंभीर बहस छेड़ रही है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि राज्य सरकार दोषियों के खिलाफ किस हद तक कार्रवाई करती है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।



