
मुंबई। महाराष्ट्र में घरेलू और व्यावसायिक गैस सिलेंडरों की आपूर्ति सुचारु बनाए रखने के लिए राज्य सरकार ने कई अहम कदम उठाए हैं। ईरान–इज़राइल संघर्ष की पृष्ठभूमि में सरकार ने जिला स्तर पर विशेष समितियां गठित करने का निर्णय लिया है, ताकि घरेलू एलपीजी सिलेंडरों की आपूर्ति में किसी प्रकार की बाधा न आए और संभावित कमी की स्थिति में बेहतर समन्वय किया जा सके। शुक्रवार को नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के अपर मुख्य सचिव अनिल डिग्गीकर ने सभी संबंधित एजेंसियों को राज्यभर में एलपीजी आपूर्ति सुचारु बनाए रखने और वितरण व्यवस्था पर प्रभावी नियंत्रण रखने के निर्देश दिए हैं। विभाग ने नागरिकों को आश्वस्त किया है कि घरेलू गैस सिलेंडरों की आपूर्ति नियमित रूप से जारी रहेगी और किसी प्रकार की चिंता की आवश्यकता नहीं है।
जिला स्तर पर विशेष समितियां होंगी गठित
घरेलू एलपीजी सिलेंडरों की आपूर्ति में बाधा न आए और संभावित कमी की स्थिति में बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने के लिए जिला स्तर पर विशेष समितियां बनाई जाएंगी। इन समितियों में जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक, जिला आपूर्ति अधिकारी तथा सभी सरकारी गैस कंपनियों के अधिकारी शामिल होंगे। समितियां गैस आपूर्ति श्रृंखला की निगरानी करेंगी, कानून-व्यवस्था बनाए रखेंगी और प्रतिदिन स्थिति की समीक्षा कर रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगी। मुंबई–ठाणे राशनिंग क्षेत्र में नियंत्रक (रेशनिंग) के अधीन एक अलग समिति गठित की जाएगी, जिसमें पुलिस उप आयुक्त और उपनियंत्रक (रेशनिंग) शामिल होंगे। मुंबई और ठाणे शहर के सभी उपायुक्तों के साथ समन्वय सह-पुलिस आयुक्त (प्रशासन) द्वारा किया जाएगा।
वैकल्पिक ईंधन के उपयोग की भी होगी जांच
प्रशासन ने वैकल्पिक ईंधन के उपयोग की संभावनाओं की जांच करने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत कोयला, मिट्टी का तेल आदि विकल्पों पर विचार किया जाएगा, हालांकि महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल के नियमों का कड़ाई से पालन अनिवार्य रहेगा। जिला स्तरीय समितियों को होटल और रेस्टोरेंट संगठनों के साथ बैठक कर वैकल्पिक ईंधन के उपयोग को प्रोत्साहित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
अत्यावश्यक सेवाओं को मिलेगी प्राथमिकता
अस्पताल, सरकारी छात्रावास, सरकारी स्कूल और कॉलेजों के मेस, मध्याह्न भोजन योजना तथा सरकारी आश्रमशालाओं जैसी अत्यावश्यक सेवाएं देने वाली संस्थाओं को घरेलू और व्यावसायिक गैस की आपूर्ति प्राथमिकता के आधार पर की जाएगी। इन संस्थाओं की सूची जारी कर उनके लिए अलग प्राथमिकता क्रम तय किया जाएगा। गैस आपूर्ति को लेकर अफवाहें न फैलें, इसके लिए प्रतिदिन रेडियो, एफएम, दूरदर्शन और प्रिंट मीडिया के माध्यम से जानकारी देने के निर्देश दिए गए हैं। इस संबंध में सूचना एवं जनसंपर्क महासंचालनालय और जिला समितियां जिम्मेदारी निभाएंगी। सोशल मीडिया पर फैलने वाली झूठी और भ्रामक खबरों पर भी कार्रवाई की जाएगी। तेल कंपनियों को गैस बुकिंग ऐप और मिस्ड कॉल सेवाओं में आने वाली तकनीकी समस्याओं को तुरंत दूर करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा राज्य, संभाग, जिला और तालुका स्तर पर नियंत्रण कक्ष शुरू किए जाएंगे और शिकायत निवारण के लिए व्हाट्सऐप सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी।
राज्य में घरेलू एलपीजी की कोई कमी नहीं
सरकारी आंकड़ों के अनुसार महाराष्ट्र में प्रतिदिन औसतन लगभग 9,000 मीट्रिक टन एलपीजी की मांग होती है। इस मांग को पूरा करने के लिए रिफाइनरियों में उत्पादन बढ़ाकर पिछले दो दिनों में 9,000 मीट्रिक टन से बढ़ाकर लगभग 11,000 मीट्रिक टन कर दिया गया है। इसी तरह राज्य में पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी), पेट्रोल और डीजल का भी पर्याप्त भंडार उपलब्ध है। बाजार की मांग पूरी करने के लिए रिफाइनरियां पूरी क्षमता से काम कर रही हैं और प्रतिदिन लगभग 15,000 किलोलीटर पेट्रोल तथा 38,000 किलोलीटर डीजल की आपूर्ति की जा रही है। विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि ईंधन आपूर्ति को लेकर किसी प्रकार की चिंता न करें, क्योंकि सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं।




