
मुंबई। बॉम्बे हाई कोर्ट ने सोमवार को अंबरनाथ नगर परिषद (एएमसी) में राजनीतिक गठबंधनों की मान्यता को लेकर ठाणे जिला कलेक्टर द्वारा जारी किए गए तीन विरोधाभासी आदेशों पर रोक लगा दी। कोर्ट ने कलेक्टर को निर्देश दिया कि वे सभी संबंधित पक्षों को दोबारा सुनें और उसके बाद तर्कसंगत व स्पष्ट फैसला पारित करें।
मान्यता बदलने के आदेश को दी गई चुनौती
जस्टिस रविंद्र घुगे और अभय मंत्री की खंडपीठ अंबरनाथ विकास अघाड़ी (एवीए) द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में कलेक्टर के 9 जनवरी के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें पहले एवीए को दी गई मान्यता रद्द कर दी गई थी और इसके बजाय एकनाथ शिंदे की शिवसेना तथा अजित पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी के गठबंधन को चुनाव-पूर्व गठबंधन के रूप में मान्यता दे दी गई थी। सुनवाई के दौरान एक हल्के-फुल्के लेकिन महत्वपूर्ण क्षण में जस्टिस घुगे ने एनसीपी के चार पार्षदों की बार-बार बदलती राजनीतिक स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा- आज ये चार लोग उनके (एकनाथ शिंदे) साथ हैं, कल किसी और के साथ थे। वे इधर-उधर घूम रहे हैं। अगर कल किसी और के साथ चले गए तो क्या होगा?
चुनावी गणित और गठबंधन की कहानी
60 सदस्यीय अंबरनाथ नगर परिषद के चुनाव 20 दिसंबर 2025 को हुए थे। परिणाम इस प्रकार रहे- शिवसेना (शिंदे गुट): 27 सीटें, बीजेपी: 14 सीटें, कांग्रेस: 12 सीटें, एनसीपी: 4 सीटें एवं निर्दलीय: 2 सीटें मिली।
हालांकि नगर परिषद अध्यक्ष का चुनाव सीधे हुआ, लेकिन किसी भी पार्टी के पास बहुमत के लिए जरूरी 31 सीटें नहीं थीं। इसके बाद बीजेपी और कांग्रेस के बीच एक अप्रत्याशित गठबंधन बना, जिसे एनसीपी के चार पार्षदों और दो निर्दलीयों का समर्थन मिला। इस गठबंधन को अंबरनाथ विकास अघाड़ी (एवीए) नाम दिया गया और कलेक्टर ने 7 जनवरी को इसे चुनाव-पूर्व गठबंधन के रूप में मान्यता दे दी। इस गठबंधन पर तीखी राजनीतिक प्रतिक्रिया हुई। कांग्रेस ने अपने 12 पार्षदों को निलंबित कर दिया, जबकि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बीजेपी को कांग्रेस से संबंध तोड़ने का निर्देश देते हुए इस गठबंधन को “अस्वीकार्य” बताया। इसके बाद कांग्रेस के पार्षद बीजेपी में शामिल हो गए। इसी बीच एनसीपी के चार पार्षदों ने शिंदे की शिवसेना को समर्थन दे दिया। इसके परिणामस्वरूप कलेक्टर ने 9 जनवरी को नया आदेश जारी कर शिवसेना-एनसीपी गठबंधन को चुनाव-पूर्व गठबंधन के रूप में मान्यता दे दी और एवीए की मान्यता रद्द कर दी।
हाई कोर्ट का अंतरिम आदेश
इन घटनाक्रमों के बाद एवीए ने बॉम्बे हाई कोर्ट का रुख किया। कोर्ट ने सभी पक्षों को 28 जनवरी तक कलेक्टर के समक्ष लिखित जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। कलेक्टर को निर्देश दिया गया है कि वे उसके बाद 21 दिनों के भीतर इस मामले में फैसला करें। कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि नया फैसला पारित होने के बाद दो हफ्ते तक लागू नहीं होगा।
तब तक कलेक्टर के 7 और 9 जनवरी के सभी संचार और आदेशों पर रोक रहेगी। हाई कोर्ट के इस आदेश ने अंबरनाथ नगर परिषद की सत्ता संरचना को फिलहाल स्थिर कर दिया है, लेकिन यह मामला यह भी उजागर करता है कि स्थानीय निकायों में बदलते गठबंधन और राजनीतिक पलटफेर किस तरह प्रशासनिक और कानूनी उलझनों को जन्म देते हैं। अंतिम फैसला अब कलेक्टर की दोबारा सुनवाई और उसके तर्कसंगत आदेश पर निर्भर करेगा।



