
श्रीनगर। अमरनाथ यात्रा 2025 इस वर्ष 3 जुलाई से शुरू होकर 9 अगस्त को रक्षा बंधन के दिन संपन्न होगी। यह 38 दिवसीय तीर्थयात्रा दो पारंपरिक मार्गों- अनंतनाग जिले के पहलगाम और गंदेरबल जिले के बालटालसे एक साथ संचालित की जाएगी। हाल ही में पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताओं के बीच प्रशासन ने यात्रा के दौरान अभूतपूर्व और बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था तैयार की है। जम्मू-कश्मीर पुलिस ने हाई-डेफिनिशन सीसीटीवी नेटवर्क, रियल-टाइम ड्रोन निगरानी, फुल-बॉडी स्कैनर और सिम-सक्षम निगरानी इकाइयाँ तैनात की हैं, जो 24 घंटे नियंत्रण केंद्रों से जुड़े रहेंगे। गुफा मंदिर क्षेत्र में 40 से अधिक एचडी सीसीटीवी और 12 बॉडी स्कैनर लगाए जाएंगे, जबकि राष्ट्रीय राजमार्ग 44 पर दूरदराज के इलाकों में निगरानी के लिए 20 सिम-आधारित कैमरे स्थापित किए गए हैं। ड्रोन विशेष रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में गतिविधियों पर नजर रखेंगे और आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया दलों को मार्गदर्शन देंगे। जम्मू रेंज के पुलिस महानिरीक्षक भीम सेन टुटी और कश्मीर रेंज के आईजीपी विधि कुमार बिरदी ने क्रमशः आधार शिविरों और सुरक्षा तैयारियों की समीक्षा की। टुटी ने टेंट, जल, स्वच्छता और बिजली बैकअप जैसे बुनियादी इंतजामों का निरीक्षण किया, जबकि बिरदी ने जिला अधिकारियों को रात्रि गश्त और राष्ट्रविरोधी तत्वों की निगरानी कड़ी करने के निर्देश दिए। इस वर्ष पहली बार यात्रा मार्गों पर स्थायी मोबाइल नेटवर्क सेवा सुनिश्चित करने के लिए दूरसंचार कंपनियों को शामिल किया गया है, जिससे उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में भी वास्तविक समय समन्वय संभव हो सकेगा। गृह मंत्रालय के निर्देश पर 1 जुलाई से 10 अगस्त तक समस्त तीर्थयात्रा मार्गों को “नो-फ्लाई जोन” घोषित किया गया है। इसके साथ ही, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ द्वारा नियमित मॉक ड्रिल के जरिए आपातकालीन स्थितियों से निपटने की तैयारियाँ की जा रही हैं। अधिकारियों का मानना है कि हालिया आतंकी घटना के बाद इस वर्ष की अमरनाथ यात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि एक संवेदनशील सुरक्षा चुनौती भी है, जिसे अत्याधुनिक निगरानी, सामंजस्य और सतर्कता के जरिए पूरी तरह सुरक्षित बनाया जाएगा।




