
मुंबई। भारत सरकार ने सार्वजनिक परिवहन केंद्रों पर महिलाओं की सुरक्षा को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से एक अहम कदम उठाते हुए घोषणा की है कि वह जल्द ही देश के सात प्रमुख रेलवे स्टेशनों– मुंबई सीएसटी, नई दिल्ली, अहमदाबाद, पुणे, हावड़ा, बेंगलुरु और चेन्नई– पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित चेहरे की पहचान प्रणाली (Facial Recognition System) लागू करेगी। यह तकनीक रेलवे परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों से जुड़ी होगी, जो वास्तविक समय में यात्रियों के चेहरों को स्कैन कर उन्हें राष्ट्रीय यौन अपराधी डेटाबेस (NDSO) से मिलान करेगी, जिसमें दो मिलियन से अधिक दोषी यौन अपराधियों के रिकॉर्ड मौजूद हैं। यदि कोई अपराधी स्टेशन परिसर में प्रवेश करता है या यात्रा करता है, तो सिस्टम स्वचालित रूप से अलर्ट जारी करेगा, जिससे सुरक्षा एजेंसियाँ तुरंत कार्रवाई कर सकेंगी। यह पहल केंद्र सरकार की “सेफ सिटी परियोजना” के तहत की जा रही है, जिसका उद्देश्य महिलाओं के खिलाफ अपराधों को रोकना और सार्वजनिक स्थलों पर सुरक्षा को तकनीकी सहायता से सशक्त बनाना है। इस योजना की शुरुआत सुप्रीम कोर्ट में महिला वकीलों के संघ द्वारा दायर एक याचिका के बाद हुई, जिसमें उन्होंने महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों और मात्र दो प्रतिशत से भी कम सजा दर की ओर ध्यान आकर्षित किया। इस तकनीक के अलावा, परियोजना के तहत स्मार्ट स्ट्रीट लाइटिंग, आपातकालीन कॉल बॉक्स, स्वचालित नंबर प्लेट पहचान प्रणाली (ANPR), और ड्रोन निगरानी जैसे उपायों को भी शामिल किया गया है। फिलहाल यह प्रणाली पायलट प्रोजेक्ट के रूप में सात स्टेशनों पर लागू की जा रही है और सफल रहने पर इसे देश के अन्य रेलवे स्टेशनों और सार्वजनिक स्थलों पर भी विस्तार देने की योजना है। सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि यह प्रणाली मौजूदा गोपनीयता कानूनों और स्पष्ट दिशानिर्देशों के अनुरूप काम करेगी, जिससे आम नागरिकों की निजता और अधिकार सुरक्षित रहेंगे।




