
मुंबई। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) तकनीक पर आधारित ‘भाषिणी’ नामक परियोजना विभिन्न भाषाओं के बीच संवाद की दूरी को कम करते हुए एक नया संवाद सेतु बन रही है। यह नागरिकों को एक भाषा से दूसरी भाषा में सहज और प्रभावी ढंग से संवाद करने में सहायता करेगी। यह जानकारी डिजिटल इंडिया भाषिणी विभाग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमिताभ नाग ने दी। वे महाराष्ट्र शासन के सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा आयोजित “टेक वारी: महाराष्ट्र टेक लर्निंग वीक” के अंतर्गत “भाषिणी – भाषा की बाधा दूर करना” विषय पर मार्गदर्शन कर रहे थे। इस अवसर पर महाराष्ट्र सदन की आवासीय आयुक्त श्रीमती आर. विमला, मराठी भाषा विभाग के सचिव श्री किरण कुलकर्णी सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
‘भाषा इंटरफेस फॉर इंडिया’ की संकल्पना पर आधारित परियोजना
श्री नाग ने बताया कि ‘भाषिणी’ परियोजना, ‘भाषा इंटरफेस फॉर इंडिया’ की संकल्पना पर आधारित है और इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का व्यापक उपयोग किया गया है। इसका उद्देश्य भारत की बहुभाषी जनसंख्या के लिए एक समग्र संवाद प्रणाली विकसित करना है, जिससे भाषा की बाधाएं दूर की जा सकें।
ऑडियो से ऑडियो अनुवाद अब संभव
‘भाषिणी’ में ऑडियो-टू-टेक्स्ट, टेक्स्ट-टू-ऑडियो और टेक्स्ट ट्रांसलेशन जैसी सुविधाएं शामिल हैं। श्री नाग ने कहा कि अब केवल लिखित अनुवाद ही नहीं, बल्कि आवाज से आवाज में भी सीधे अनुवाद संभव है। यदि कोई व्यक्ति अपनी मातृभाषा में बोलता है, तो सामने वाला व्यक्ति उसे अपनी भाषा में सुन सकता है, जिससे आपसी संवाद अधिक सहज हो सकेगा।
शासकीय सेवाओं और शिक्षा में होगा बड़ा उपयोग
श्री नाग ने यह भी बताया कि ‘भाषिणी’ के माध्यम से शासकीय योजनाओं की जानकारी, हेल्पलाइन सेवाएं और शैक्षणिक सामग्री अब क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध कराई जाएगी। इससे विशेष रूप से ग्रामीण और भाषायी विविधता वाले क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों को योजनाओं का लाभ उठाने और जानकारी प्राप्त करने में अत्यंत सहूलियत होगी।




